लखनऊ
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का टोल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने तय कर दिया है, जो अपेक्षाकृत काफी महंगा माना जा रहा है। एक तरफ की यात्रा के लिए न्यूनतम टोल 275 रुपये रखा गया है। इसके चलते अब यात्रियों के लिए शताब्दी, तेजस और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें एक मजबूत और किफायती विकल्प के रूप में सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, एक्सप्रेसवे से लखनऊ से कानपुर पहुंचने में करीब दो घंटे तक का समय लग सकता है, जबकि तेजस और शताब्दी जैसी ट्रेनें यह दूरी लगभग 1 घंटे 10 मिनट से 1 घंटे 20 मिनट में तय कर लेती हैं। यही कारण है कि समय और लागत दोनों के लिहाज से ट्रेनें अधिक सुविधाजनक विकल्प मानी जा रही हैं।
एनएचएआई द्वारा तैयार यह एक्सप्रेसवे लगभग 3600 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और इसे दो चरणों में विकसित किया गया है। यह मार्ग स्कूटर इंडिया से शुरू होकर उन्नाव के शुक्लागंज तक जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधे कानपुर तक नहीं जुड़ता, बल्कि आगे गंगा पुल और जाजमऊ मार्ग से शहर में प्रवेश करना होगा, जिससे समय बढ़ सकता है।
रेल यात्री संगठनों ने भी इस परियोजना पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इसे “लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे” कहना पूरी तरह सही नहीं है क्योंकि यह सीधे कानपुर शहर तक नहीं पहुंचाता। इससे यात्रियों को अतिरिक्त दूरी और ट्रैफिक का सामना करना पड़ सकता है, जिससे यात्रा समय और बढ़ जाएगा।
टोल दरों की बात करें तो कार, जीप और वैन के लिए 275 रुपये एक तरफ का शुल्क रखा गया है, जबकि बस और ट्रक के लिए यह राशि 935 रुपये तक पहुंचती है। वहीं नियमित यात्रियों के लिए वार्षिक पास का विकल्प भी दिया गया है, जिसकी कीमत लगभग 3075 रुपये तय की गई है।
वहीं दूसरी ओर, रेल सेवाएं यात्रियों को समय और लागत दोनों में राहत देती दिख रही हैं। तेजस, शताब्दी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों में कई सीटें अभी भी खाली हैं और इनका किराया 490 से 500 रुपये के बीच है। ऐसे में एक्सप्रेसवे की तुलना में ट्रेन यात्रा अधिक तेज, सस्ती और सुविधाजनक विकल्प बनकर उभर रही है।


