
लगभग सात दर्जन यात्रियों को सड़क पर छोड़ भागे बस कर्मी
फर्रुखाबाद। जनपद में ओवरलोड डग्गामार बसों का संचालन किस कदर बेलगाम हो चुका है, इसकी बानगी शुक्रवार को दरियायगंज के निकट देखने को मिली। छिबरामऊ से फर्रुखाबाद आ रही एक निजी बस बीच रास्ते खराब हो गई, जिसके बाद उसमें सवार दर्जनों यात्रियों को भीषण गर्मी में सड़क किनारे घंटों परेशान होना पड़ा। घटना ने न केवल यात्री सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस संख्या यूपी 11 टी 7860 में क्षमता से कहीं अधिक यात्री भरे गए थे। दरियागंज के निकट बस खराब होने पर यात्रियों ने किराया वापस करने की मांग की, ताकि वे अन्य साधनों से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें। आरोप है कि बस कर्मियों ने किराया लौटाने से इंकार कर दिया और यात्रियों को उनके हाल पर छोड़कर मौके से चले गए। करीब सात दर्जन यात्री, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल थे, तेज धूप और उमस के बीच सड़क किनारे खड़े रहने को मजबूर हो गए।
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब पीछे से आई दूसरी बस यूपी 76 के 9697 में सभी यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भर दिया गया। यात्रियों की संख्या इतनी अधिक थी कि बस में खड़े होने तक की जगह नहीं बची थी। इसके बावजूद बस को फर्रुखाबाद की ओर रवाना कर दिया गया, मानो यात्री नहीं बल्कि सामान ढोया जा रहा हो।
घटना के बाद लोगों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन एआरटीओ का मोबाइल फोन बंद मिला। ट्रैफिक प्रभारी सत्येंद्र कुमार ने सेंट्रल जेल चौकी के निकट बस को रुकवाकर जांच की और बताया कि अनियमितताएं पाए जाने पर 24 हजार रुपये का चालान किया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन ओवरलोड बसों का संचालन प्रतिदिन खुलेआम हो रहा है, वे थाना जहानगंज, राजपूताना चौकी, सेंट्रल जेल चौकी और एआरटीओ कार्यालय के सामने से गुजरती हैं, फिर भी उन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं होती। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी है। कई बस संचालक और चालक नाम न छापने की शर्त पर दावा करते हैं कि व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों तक नियमित रूप से धन पहुंचाया जाता है, जिसके कारण नियमों की अनदेखी करने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती। शासन स्तर से सख्ती के आदेश आने पर कुछ दिनों तक अभियान चलाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।
दरियागंज की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जिले में यात्री सुरक्षा भगवान भरोसे है। यदि समय रहते ओवरलोड और डग्गामार वाहनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो किसी दिन यही लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि आखिर जिम्मेदार विभाग यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही उसकी नींद खुलेगी।


