अयोध्या
रामनगरी अयोध्या में मां सरयू की संध्या आरती अब पहले से अधिक भव्य, अनुशासित और रंगों से सजी नजर आएगी। श्रद्धालुओं के लिए यह आरती न केवल आध्यात्मिक अनुभव होगी, बल्कि दृश्य सौंदर्य का भी अद्भुत संगम बनेगी। प्रशासन ने आरती की परंपरा को अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए पुजारियों के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत अब आरती में शामिल सभी पुजारी सप्ताह के निर्धारित दिनों के अनुसार अलग-अलग रंगों के वस्त्र धारण करेंगे। यह बदलाव आरती को एकरूपता और विशेष पहचान देने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे घाट पर होने वाला यह धार्मिक आयोजन और अधिक आकर्षक दिखाई देगा।
ड्रेस कोड के अनुसार सोमवार और शुक्रवार को पुजारी श्वेत वस्त्र पहनेंगे, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। मंगलवार को भगवा रंग शक्ति और भक्ति का संदेश देगा, जबकि रविवार को लाल रंग ऊर्जा और उत्साह को दर्शाएगा। इसी तरह बुधवार को हरा, बृहस्पतिवार को पीला और शनिवार को नीले रंग के वस्त्र निर्धारित किए गए हैं।
संध्या के समय जब सरयू तट पर दीपों की पंक्तियां जलती हैं और शंख-घंटियों की ध्वनि गूंजती है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। अब इस दृश्य में रंग-बिरंगे वस्त्रों की यह नई परंपरा श्रद्धालुओं को और भी दिव्य अनुभव प्रदान करेगी।
सरकारी स्तर पर सरयू आरती घाट का भी सौंदर्यीकरण किया गया है। संगमरमर की वेदियां, लाल पत्थरों से बनी छतरीनुमा संरचनाएं और आकर्षक सेल्फी प्वाइंट इस स्थान को और भव्य बनाते हैं। घाट पर रामायण के प्रसंगों की झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
अयोध्या प्रशासन का मानना है कि यह नया बदलाव न केवल धार्मिक परंपरा को संरक्षित करेगा, बल्कि सरयू आरती को एक सांस्कृतिक पहचान भी देगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एक अनोखा और संगठित आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा।


