जुलाई में डीपीसी के बाद जारी होगी फाइनल सूची, सर्विस रिकॉर्ड और गोपनीय प्रविष्टियां बनेंगी कसौटी
यूथ इंडिया | लखनऊ ब्यूरो
उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश के 29 पीपीएस अधिकारियों को जल्द आईपीएस कैडर में प्रमोट किए जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। शासन स्तर से 1998, 1999 और 2000 बैच के पीपीएस अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी ) को भेज दिए गए हैं, जबकि 2001 बैच के कुछ अधिकारियों के नामों पर भी विचार चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक रिक्त पदों के सापेक्ष तीन गुना नाम भेजने के नियम के तहत विस्तृत सूची तैयार की गई है। अब यूपीएससी सभी अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, वार्षिक गोपनीय प्रविष्टियों (एसीआर ) और लंबित विभागीय जांचों की गहन समीक्षा करेगी। जिन अधिकारियों की सर्विस प्रोफाइल साफ और प्रदर्शन बेहतर पाया जाएगा, उन्हें आईपीएस प्रमोशन की दौड़ में प्राथमिकता मिल सकती है।
पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग के बीच पिछले कई दिनों से इस मुद्दे पर मंथन चल रहा था। माना जा रहा है कि 1998 बैच के कई वरिष्ठ पीपीएस अधिकारियों को इस बार प्रमोशन का लाभ मिल सकता है। हालांकि जिन अधिकारियों पर विभागीय जांच या विवादित प्रविष्टियां हैं, उनके नामों पर अंतिम समय में रोक भी लग सकती है।
सूत्र बताते हैं कि जुलाई 2026 में होने वाली विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी ) की बैठक इस प्रक्रिया का सबसे अहम चरण होगी। इसी बैठक के बाद अंतिम सूची पर मुहर लगेगी। प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर में शामिल किया जाएगा, जिससे प्रदेश पुलिस की प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पुलिस महकमे में इस संभावित प्रमोशन सूची को लेकर अंदरखाने लॉबिंग और हलचल भी तेज हो गई है। कई अधिकारी अपने सर्विस रिकॉर्ड को लेकर सक्रिय हैं, जबकि कुछ अफसरों की पुरानी जांच फाइलें भी दोबारा खंगाली जा रही हैं। ऐसे में यह प्रमोशन प्रक्रिया सिर्फ वरिष्ठता नहीं बल्कि “क्लीन सर्विस प्रोफाइल” की भी परीक्षा बनती दिख रही है।


