सभी दलों के नेताओं से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील
नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक का आमरण अनशन सोमवार को 16वें दिन भी जारी रहा। लगातार अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को बचाने का संघर्ष है।वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की जनता और युवाओं की आवाज़ सुनने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे पर संवाद शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल एक मंत्री का इस्तीफा आंदोलन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही तय करने की पहली सीढ़ी है। जब तक व्यवस्था में जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक पेपर लीक, भ्रष्टाचार और मनमाने फैसले रुकने वाले नहीं हैं।उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा का पेपर लीक होगा तो देश को योग्य डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर कैसे मिलेंगे। नकल और भ्रष्टाचार से निकली व्यवस्था अंततः पूरे समाज को नुकसान पहुंचाएगी। उनके अनुसार आज सबसे बड़ी चिंता यह है कि ईमानदारी का मूल्य लगातार घट रहा है और परीक्षा के प्रश्नपत्र से लेकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं तक सब कुछ संदेह के घेरे में आता जा रहा है।सोनम वांगचुक ने बताया कि अब तक सरकार की ओर से उनसे कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संपर्क नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने अब भी इस आवाज़ को नहीं सुना तो इसकी जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी होगी, क्योंकि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे केवल सोशल मीडिया पर समर्थन देने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करें।जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में प्रतिदिन हजारों लोग पहुंच रहे हैं। वांगचुक का कहना है कि यह मंच किसी राजनीतिक दल का नहीं है और इसमें सभी विचारधाराओं के लोगों का स्वागत है। उन्होंने भाजपा सहित सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यदि कोई भी दल छात्रों और शिक्षा सुधार के इस आंदोलन से दूरी बनाता है तो जनता उसके रुख का स्वयं आकलन करेगी।उन्होंने कहा कि संसद के आगामी मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। साथ ही सरकार को छात्रों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को साथ लेकर ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक वर्षों से शिक्षा सुधार और हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। उनकी विकसित आइस स्तूप तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। उनकी कार्यशैली और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों ने फिल्म “3 इडियट्स” के चर्चित किरदार फुंसुख वांगडू को भी प्रेरित किया था। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार 16 दिनों से जारी अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और चिकित्सकों की चिंता बढ़ती जा रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, छात्रों और कई राजनीतिक नेताओं ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार का ठोस आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
यह आंदोलन अब केवल एक मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश में शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक संवाद को लेकर एक व्यापक बहस का विषय बन चुका है।


