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Sunday, April 19, 2026
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आर्मी डे पर ईरान का सख्त संदेश: सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बोले सेना बने ‘बिजली की तरह वार करने वाली ताकत’, युद्ध अभी खत्म नहीं

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नासिक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मोजतबा खामेनेई ने आर्मी डे के अवसर पर देश की सेना को लेकर कड़ा और रणनीतिक संदेश दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने हाल ही में समाप्त हुए 40 दिन के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से मोर्चा संभाला और उन्हें करारा जवाब दिया। सुप्रीम लीडर बनने के बाद यह उनका पहला आर्मी डे संबोधन था, जिसे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने भाषण में खामेनेई ने सेना की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि ईरानी सेना “बिजली की तरह तेज और घातक हमला करने” की ताकत हासिल करे। उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मनों की रणनीति कमजोर है और ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और रणनीतिक विस्तार के लिए नए कदम उठाए जाएंगे।
सुप्रीम लीडर ने विशेष रूप से ड्रोन तकनीक, मिसाइल क्षमता और नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ईरान की रक्षा व्यवस्था अब पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश के ड्रोन सिस्टम दुश्मनों पर सटीक और तेज हमले करने में सक्षम हैं, जबकि नौसेना किसी भी समुद्री चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह भी संकेत दिया गया कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में और निवेश व विस्तार किया जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने हालिया युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके बलिदान ने ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है। खामेनेई ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध भले ही फिलहाल युद्धविराम के साथ थमा हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। उन्होंने सेना को सतर्क रहने और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान न केवल ईरान की आंतरिक सैन्य नीति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सख्त संदेश देता है कि ईरान आने वाले समय में किसी भी चुनौती का जवाब और अधिक ताकत के साथ देने की तैयारी में है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

‘मैं जिंदा हूं’ कहकर तहसील पहुंचा युवक, भाई पर संपत्ति हड़पने और लेखपाल पर मिलीभगत का गंभीर आरोप

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मैनपुरी

जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर उसकी पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगा है। यह मामला तहसील क्षेत्र के गांव धोबई का है, जहां निवासी हेमराज ने खुद तहसील पहुंचकर अधिकारियों के सामने गुहार लगाई और कहा कि “मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मुझे मृत दिखा दिया गया है।”
हेमराज ने एसडीएम सुनिष्ठा सिंह के समक्ष प्रस्तुत होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसने बताया कि उसके पिता रामेश्वर दयाल की मृत्यु के बाद संपत्ति का बंटवारा होना था, लेकिन उसके भाई रामू ने कथित रूप से लेखपाल के साथ मिलीभगत कर उसे रिकॉर्ड में मृत दिखवा दिया। इसके बाद पूरी संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है और मोटी रकम लेकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया है।
पीड़ित का कहना है कि जब उसे इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो वह हैरान रह गया। उसने कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन सुनवाई न होने पर मजबूर होकर तहसील पहुंचा और उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की। उसने प्रशासन से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उसकी संपत्ति उसे वापस दिलाई जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सुनिष्ठा सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किए और प्रकरण को तहसीलदार को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुए अन्याय को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत न हो तो किस तरह से किसी को कागजों में “मृत” दिखाकर उसकी संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने और पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद है।

करोड़ों की सरकारी जमीन पर फर्जीवाड़ा उजागर, डीएम ने दिए जांच के आदेश; प्रशासन में मचा हड़कंप

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औरैया

जनपद में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सदर तहसील क्षेत्र के ककराही गांव में धान व दाल मिल संचालित करने के नाम पर करोड़ों रुपये की कीमती सरकारी जमीन पर कब्जा किए जाने की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संबंधित जमीन को कब्जाने के लिए पुराने दस्तावेजों का सहारा लिया गया। बताया जा रहा है कि वर्ष 1971 में एक इकरारनामा तैयार किया गया था, जबकि इसके आधार पर वर्ष 1988 में कथित रूप से आदेश जारी कर जमीन को निजी उपयोग में दर्शा दिया गया। प्रशासन को आशंका है कि इस पूरी प्रक्रिया में दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी भूमि को निजी संपत्ति में बदलने की कोशिश की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, ककराही गांव में जिस भूमि पर धान और दाल मिल संचालित होने का दावा किया गया है, उसकी वास्तविक स्थिति और स्वामित्व को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब पुराने रिकॉर्ड, अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कर सच्चाई सामने लाने में जुटा है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जनपद में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करते हुए जमीन को मुक्त कराया जाएगा और जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाएगा। फिलहाल इस पूरे प्रकरण की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फौजी के बंद मकान को चोरों ने बनाया निशाना, लाखों के जेवरात पार; पुलिस जांच में जुटी

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औरैया

जनपद के अजीतमल क्षेत्र में चोरी की एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां चोरों ने एक फौजी के बंद पड़े मकान को निशाना बनाकर लाखों रुपये के जेवरात पार कर दिए। घटना से इलाके में दहशत का माहौल है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, अनंतराम कस्बे के मोहल्ला गांधी नगर, बिजली घर के पास स्थित निवासी अनिल सेंगर का मकान लंबे समय से बंद पड़ा था। अनिल सेंगर भारतीय सेना में तैनात हैं और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग प्रयागराज में है। बच्चों की पढ़ाई के चलते उनकी पत्नी कानपुर में रहती हैं, जिससे मकान खाली रहता था। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया।
बताया जा रहा है कि गांव बबाइन निवासी अनिल सेंगर के छोटे भाई मोनू सेंगर किसी कार्य से अजीतमल स्थित मकान पहुंचे, जहां उन्होंने घर का ताला टूटा देखा। अंदर जाकर देखा तो अलमारी और बक्सों के ताले टूटे हुए थे और उनमें रखा कीमती जेवरात गायब था। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ भी की और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी लेने का प्रयास किया। पीड़ित परिवार का कहना है कि घर में रखे लाखों रुपये के जेवरात चोरी हुए हैं, हालांकि पूरी चोरी की सूची परिवार के अन्य सदस्यों के आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
कोतवाली प्रभारी ललितेश नारायण त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा। साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि चोरों का सुराग लगाया जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर खाली पड़े मकानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि घर खाली छोड़ने की स्थिति में पड़ोसियों को सूचना दें और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करें, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिशर वन में बनी सैयद बाबा की मजार हटाने के आदेश, स्वामित्व के साक्ष्य न दे पाने पर कार्रवाई तेज

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इटावा

जनपद में संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए फिशर वन क्षेत्र में बनी सैयद बाबा की मजार को हटाने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई उस समय की गई जब मजार पक्ष भूमि के स्वामित्व से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। वन विभाग कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, इटावा सफारी मार्ग से करीब एक किलोमीटर अंदर फिशर वन क्षेत्र में स्थित इस मजार को स्थानीय लोग “बीहड़ वाले सैयद बाबा” के नाम से जानते हैं। एक शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी, जिसमें यह सामने आया कि मजार संरक्षित वन भूमि पर बनी हुई है और विभागीय अभिलेखों में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
मामले को लेकर प्राधिकृत अधिकारी वन विभाग कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां मजार की देखरेख करने वाले फजले इलाही और उनके अधिवक्ता को भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर भी पक्षकार कोई वैध कागजात या स्वामित्व के प्रमाण पेश नहीं कर सके। इस पर वन विभाग की ओर से वादी बने वन दरोगा अशोक शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए मजार को अवैध कब्जा बताया।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 0.0281 हेक्टेयर वन भूमि पर यह निर्माण अवैध रूप से किया गया था। पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के चलते वन विभाग कोर्ट ने मजार को हटाने और संबंधित भूमि से बेदखली के आदेश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेज दी गई है, ताकि आगे की कार्रवाई जिला प्रशासन के स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में संरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में भी कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। फिलहाल प्रशासन द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है और जल्द ही आदेश का पालन कराते हुए मजार को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

अक्षय तृतीया पर बाजारों में रौनक, वाहनों से लेकर जेवरों तक बंपर खरीदारी की उम्मीद

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इटावा

जनपद में अक्षय तृतीया का पर्व व्यापारियों के लिए इस बार बड़ी सौगात लेकर आ रहा है। रविवार को पड़ने वाले इस शुभ अवसर को लेकर शहर के बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। सराफा बाजार से लेकर वाहन शोरूम तक खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और व्यापारी भी बेहतर कारोबार की उम्मीद में तैयारियों में जुटे हुए हैं।
शहर के प्रमुख बाजार जैसे शास्त्री चौराहा, नौरंगाबाद और पचराहा सहित फ्रेंड्स कॉलोनी, भरथना, बकेवर और जसवंतनगर क्षेत्रों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष आलोक दीक्षित के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये तक का कारोबार होने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है।
सराफा व्यापारियों का कहना है कि सोने-चांदी के दाम ऊंचे होने के बावजूद ग्राहकों की खरीदारी पर इसका खास असर नहीं पड़ा है। सराफा व्यापारी विनीत पोरवाल के अनुसार इस बार बुकिंग में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोग विशेष रूप से शगुन के तौर पर सोने की गिन्नी, चांदी के सिक्के और हल्के आभूषण खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। बाजार में आकर्षक डिजाइनों और ऑफर्स के चलते ग्राहकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जिले के प्रमुख ऑटो डीलर संजय अग्रवाल के अनुसार इस बार पेट्रोल वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग में भी तेजी आई है और 100 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की प्री-बुकिंग हो चुकी है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों की करीब 600 यूनिट और 100 से अधिक कारों की डिलीवरी का अनुमान लगाया जा रहा है। लग्जरी कारों के शोरूम भी विशेष रूप से सजाए गए हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई ऑफर्स दिए जा रहे हैं।
कृषि क्षेत्र से जुड़े उपकरणों जैसे ट्रैक्टर आदि की बिक्री में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। व्यापारियों के अनुसार केवल सराफा बाजार में ही करीब 30 करोड़ रुपये के जेवर और सिक्कों की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों का कारोबार भी एक करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है, जिस दिन बिना मुहूर्त के खरीदारी करना मंगलकारी समझा जाता है। इसी कारण हर वर्ग के लोग इस दिन निवेश और खरीदारी को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में इस बार इटावा के बाजारों में उमड़ी भीड़ और व्यापारियों की तैयारियां एक बड़े आर्थिक गतिविधि की ओर संकेत कर रही हैं।