मैनपुरी
जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर उसकी पैतृक संपत्ति हड़पने का आरोप लगा है। यह मामला तहसील क्षेत्र के गांव धोबई का है, जहां निवासी हेमराज ने खुद तहसील पहुंचकर अधिकारियों के सामने गुहार लगाई और कहा कि “मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मुझे मृत दिखा दिया गया है।”
हेमराज ने एसडीएम सुनिष्ठा सिंह के समक्ष प्रस्तुत होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसने बताया कि उसके पिता रामेश्वर दयाल की मृत्यु के बाद संपत्ति का बंटवारा होना था, लेकिन उसके भाई रामू ने कथित रूप से लेखपाल के साथ मिलीभगत कर उसे रिकॉर्ड में मृत दिखवा दिया। इसके बाद पूरी संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है और मोटी रकम लेकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया है।
पीड़ित का कहना है कि जब उसे इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो वह हैरान रह गया। उसने कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन सुनवाई न होने पर मजबूर होकर तहसील पहुंचा और उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की। उसने प्रशासन से अपील की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उसकी संपत्ति उसे वापस दिलाई जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सुनिष्ठा सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी किए और प्रकरण को तहसीलदार को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और राजस्व अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुए अन्याय को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता और निगरानी मजबूत न हो तो किस तरह से किसी को कागजों में “मृत” दिखाकर उसकी संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आने और पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद है।


