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Saturday, April 18, 2026

आर्मी डे पर ईरान का सख्त संदेश: सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई बोले सेना बने ‘बिजली की तरह वार करने वाली ताकत’, युद्ध अभी खत्म नहीं

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नासिक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मोजतबा खामेनेई ने आर्मी डे के अवसर पर देश की सेना को लेकर कड़ा और रणनीतिक संदेश दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने हाल ही में समाप्त हुए 40 दिन के युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान की सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से मोर्चा संभाला और उन्हें करारा जवाब दिया। सुप्रीम लीडर बनने के बाद यह उनका पहला आर्मी डे संबोधन था, जिसे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अपने भाषण में खामेनेई ने सेना की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि ईरानी सेना “बिजली की तरह तेज और घातक हमला करने” की ताकत हासिल करे। उन्होंने कहा कि हालिया युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मनों की रणनीति कमजोर है और ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और रणनीतिक विस्तार के लिए नए कदम उठाए जाएंगे।
सुप्रीम लीडर ने विशेष रूप से ड्रोन तकनीक, मिसाइल क्षमता और नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ईरान की रक्षा व्यवस्था अब पहले से कहीं ज्यादा सशक्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश के ड्रोन सिस्टम दुश्मनों पर सटीक और तेज हमले करने में सक्षम हैं, जबकि नौसेना किसी भी समुद्री चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह भी संकेत दिया गया कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में और निवेश व विस्तार किया जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने हालिया युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके बलिदान ने ही देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है। खामेनेई ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध भले ही फिलहाल युद्धविराम के साथ थमा हो, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। उन्होंने सेना को सतर्क रहने और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान न केवल ईरान की आंतरिक सैन्य नीति को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सख्त संदेश देता है कि ईरान आने वाले समय में किसी भी चुनौती का जवाब और अधिक ताकत के साथ देने की तैयारी में है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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