इटावा
जनपद में संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए फिशर वन क्षेत्र में बनी सैयद बाबा की मजार को हटाने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई उस समय की गई जब मजार पक्ष भूमि के स्वामित्व से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। वन विभाग कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, इटावा सफारी मार्ग से करीब एक किलोमीटर अंदर फिशर वन क्षेत्र में स्थित इस मजार को स्थानीय लोग “बीहड़ वाले सैयद बाबा” के नाम से जानते हैं। एक शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी, जिसमें यह सामने आया कि मजार संरक्षित वन भूमि पर बनी हुई है और विभागीय अभिलेखों में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
मामले को लेकर प्राधिकृत अधिकारी वन विभाग कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां मजार की देखरेख करने वाले फजले इलाही और उनके अधिवक्ता को भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर भी पक्षकार कोई वैध कागजात या स्वामित्व के प्रमाण पेश नहीं कर सके। इस पर वन विभाग की ओर से वादी बने वन दरोगा अशोक शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए मजार को अवैध कब्जा बताया।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 0.0281 हेक्टेयर वन भूमि पर यह निर्माण अवैध रूप से किया गया था। पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के चलते वन विभाग कोर्ट ने मजार को हटाने और संबंधित भूमि से बेदखली के आदेश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेज दी गई है, ताकि आगे की कार्रवाई जिला प्रशासन के स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में संरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में भी कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। फिलहाल प्रशासन द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है और जल्द ही आदेश का पालन कराते हुए मजार को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।


