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Sunday, April 19, 2026
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फिशर वन में बनी सैयद बाबा की मजार हटाने के आदेश, स्वामित्व के साक्ष्य न दे पाने पर कार्रवाई तेज

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इटावा

जनपद में संरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर वन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए फिशर वन क्षेत्र में बनी सैयद बाबा की मजार को हटाने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई उस समय की गई जब मजार पक्ष भूमि के स्वामित्व से संबंधित कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। वन विभाग कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, इटावा सफारी मार्ग से करीब एक किलोमीटर अंदर फिशर वन क्षेत्र में स्थित इस मजार को स्थानीय लोग “बीहड़ वाले सैयद बाबा” के नाम से जानते हैं। एक शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की थी, जिसमें यह सामने आया कि मजार संरक्षित वन भूमि पर बनी हुई है और विभागीय अभिलेखों में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
मामले को लेकर प्राधिकृत अधिकारी वन विभाग कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां मजार की देखरेख करने वाले फजले इलाही और उनके अधिवक्ता को भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया गया था। हालांकि निर्धारित समय सीमा के भीतर भी पक्षकार कोई वैध कागजात या स्वामित्व के प्रमाण पेश नहीं कर सके। इस पर वन विभाग की ओर से वादी बने वन दरोगा अशोक शर्मा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए मजार को अवैध कब्जा बताया।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 0.0281 हेक्टेयर वन भूमि पर यह निर्माण अवैध रूप से किया गया था। पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के चलते वन विभाग कोर्ट ने मजार को हटाने और संबंधित भूमि से बेदखली के आदेश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भेज दी गई है, ताकि आगे की कार्रवाई जिला प्रशासन के स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में संरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में भी कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। फिलहाल प्रशासन द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है और जल्द ही आदेश का पालन कराते हुए मजार को हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

अक्षय तृतीया पर बाजारों में रौनक, वाहनों से लेकर जेवरों तक बंपर खरीदारी की उम्मीद

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इटावा

जनपद में अक्षय तृतीया का पर्व व्यापारियों के लिए इस बार बड़ी सौगात लेकर आ रहा है। रविवार को पड़ने वाले इस शुभ अवसर को लेकर शहर के बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। सराफा बाजार से लेकर वाहन शोरूम तक खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और व्यापारी भी बेहतर कारोबार की उम्मीद में तैयारियों में जुटे हुए हैं।
शहर के प्रमुख बाजार जैसे शास्त्री चौराहा, नौरंगाबाद और पचराहा सहित फ्रेंड्स कॉलोनी, भरथना, बकेवर और जसवंतनगर क्षेत्रों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष आलोक दीक्षित के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये तक का कारोबार होने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है।
सराफा व्यापारियों का कहना है कि सोने-चांदी के दाम ऊंचे होने के बावजूद ग्राहकों की खरीदारी पर इसका खास असर नहीं पड़ा है। सराफा व्यापारी विनीत पोरवाल के अनुसार इस बार बुकिंग में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लोग विशेष रूप से शगुन के तौर पर सोने की गिन्नी, चांदी के सिक्के और हल्के आभूषण खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। बाजार में आकर्षक डिजाइनों और ऑफर्स के चलते ग्राहकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। जिले के प्रमुख ऑटो डीलर संजय अग्रवाल के अनुसार इस बार पेट्रोल वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग में भी तेजी आई है और 100 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की प्री-बुकिंग हो चुकी है। इसके अलावा दोपहिया वाहनों की करीब 600 यूनिट और 100 से अधिक कारों की डिलीवरी का अनुमान लगाया जा रहा है। लग्जरी कारों के शोरूम भी विशेष रूप से सजाए गए हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई ऑफर्स दिए जा रहे हैं।
कृषि क्षेत्र से जुड़े उपकरणों जैसे ट्रैक्टर आदि की बिक्री में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। व्यापारियों के अनुसार केवल सराफा बाजार में ही करीब 30 करोड़ रुपये के जेवर और सिक्कों की बिक्री होने का अनुमान है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों का कारोबार भी एक करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है, जिस दिन बिना मुहूर्त के खरीदारी करना मंगलकारी समझा जाता है। इसी कारण हर वर्ग के लोग इस दिन निवेश और खरीदारी को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में इस बार इटावा के बाजारों में उमड़ी भीड़ और व्यापारियों की तैयारियां एक बड़े आर्थिक गतिविधि की ओर संकेत कर रही हैं।

महिला आरक्षण बिल की हार के बाद पीएम मोदी ने महिलाओं से मांगी माफी, विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार

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नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संशोधन विधेयक गिरने के बाद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश की सभी महिलाओं से माफी मांगी और विपक्षी दलों पर “स्वार्थी राजनीति” के कारण भारत की महिलाओं को सशक्त बनाने की लड़ाई में बाधा डालने का आरोप लगाया। पीएम मोदी लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) के गिरने को लेकर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया है। इससे पहले तमिलनाडु में थोड़ी देर पहले इस बिल के पारित न होने का जिम्मेदार उन्होंने विपक्ष को ठहराया था।

लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने वाले विधेयक के खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा, भारत की महिलाओं ने देखा कि कैसे कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों ने हमारी महिला शक्ति के खिलाफ अपनी स्वार्थी राजनीति का जश्न मनाया। विपक्ष ने महिला आरक्षण का विरोध करके पाप किया है और उन्हें इसका दंड अवश्य मिलेगा।

इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर सका। शुक्रवार रात लोकसभा में विधेयक पर मतदान के दौरान, 298 सदस्यों ने इसके समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।

प्रधानमंत्री ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का अनादर करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा, वे यह भूल रहे हैं कि 21वीं सदी की महिलाएं देश में हो रहे हर घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही हैं। वे इरादों को भांप सकती हैं और सच्चाई को स्पष्ट रूप से समझ सकती हैं। मोदी ने कहा- इसलिए, महिला आरक्षण का विरोध करने में विपक्ष द्वारा किया गया पाप निश्चित रूप से दंडित होगा।

इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है, और वे जनता द्वारा दी जाने वाली सजा से बच नहीं पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि सदन में पेश किया गया महिला आरक्षण विधेयक किसी से कुछ छीनने के बारे में नहीं है, बल्कि सभी को कुछ देने के बारे में है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “ये संसद में सभी राज्यों को अधिक शक्ति और समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। राज्य छोटा हो, बड़ा हो, दक्षिण का हो, भारत का हो, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस प्रयास की भ्रूण हत्या कर दी है। कांग्रेस, DMK, TMC जैसे दल इस के अपराधी है। ये देश की नारी शक्ति के अपराधी है। कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से षडयंत्र किए हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि देश की नारी जब अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी तो याद रखेगी कि इन्हीं लोगों ने महिला आरक्षण को संसद में रोकने का काम किया जिन दलों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध किया उनसे मैं दो टूक कहूंगा- ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्राटेंड ले रहे हैं। यह लोग भूल रहे हैं कि 21 सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही हैं। वो उनकी मंशा भाप रही हैं और सच्चाई भी भली-भांति जान चुकी हैं। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके, जो पाप विपक्ष ने किया है। इसलिए उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से बच नहीं पाएंगे।

उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति का प्रस्ताव गिरा तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर ये लोग मेजे थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया, वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उनके आत्मसम्मान पर चोट थी। उन्होंने कहा कि नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं देश की नारी शक्ति को विश्वास दिलाता हुआ कि इसके विरोध में आने वाली हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे। कल हमारे पास संख्या बल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम हार गए हैं। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारे पास आगे भी और मौके आएंगे।

बता दें कि, महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। लोकसभा में इस बिल पर कुल 528 वोट पड़े, बिल को पारित कराने के लिए सरकार को 352 वोट की जरूरत थी, लेकिन इसके पक्ष में 298 वोट ही पड़े। ऐसे में 54 वोटों के अभाव से ये बिल गिर गया था। इसे लेकर ही पीएम मोदी विपक्षी दलों पर जमकर बरस रहे हैं।

 

https://x.com/narendramodi/status/2045517805915713592?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2045517805915713592%7Ctwgr%5E44a5ca2af88a8643d83bfa927b2b117153d54e05%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Flalluram.com%2Fpm-modi-begins-his-address-to-the-nation-saying-the-flight-of-women-power-has-been-stopped%2F

 

पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लड़कियों को धमकाकर रंगदारी मांगने वाले 2 बदमाश गिरफ्तार

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चंदौली: यूपी के चंदौली (Chandauli) जिले की धानापुर पुलिस ने लड़कियों को धमकाकर रंगदारी मांगने वाले दो अभियुक्तों को गिरफ्तार (arrested) किया है। ये आरोपी अपने शौक पूरे करने के लिए लड़कियों को निशाना बनाते थे और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी देकर गहने और नगदी ऐंठते थे। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक, धानापुर थाना क्षेत्र के प्रसादपुर निवासी घनश्याम यादव ने पुलिस को लिखित तहरीर देते हुए बताया था कि मोहित यादव पुत्र शिवकुमार यादव और नीरज यादव पुत्र निर्गुण यादव (निवासी ग्राम बड़ी रामराज, धानापुर) ने उनकी बेटी को परिवार को जान से मारने की धमकी दी। डर के कारण उनकी बेटी ने घर में रखे मां के गहने और एक लाख रुपये इन आरोपियों को दे दिए।

शिकायत के आधार पर धानापुर पुलिस ने दोनों आरोपियों मोहित यादव और नीरज यादव को शहीद गांव के पास से गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से एक जोड़ी चांदी की पैजनी, एक सोने का मांग टीका, एक सोने की अंगूठी, एक चांदी की कमरबंद, दो सोने के कान के टॉप्स, एक सोने की नथिया और 1 लाख 350 रुपये बरामद किए गए। बरामद सामान की कुल कीमत तीन लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।

क्षेत्राधिकारी सकलडीहा स्नेहा तिवारी ने मीडिया को बताया कि ये दोनों अभियुक्त शातिर किस्म के हैं और अपने शौक पूरे करने के लिए ऐसी वारदातें करते थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे इन पैसों को घूमने-फिरने पर खर्च करते थे और बाकी बचे गहनों को बेचने की फिराक में थे।

 

 

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से युवक की मौत, घर में पसरा मातम

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बदायूं: यूपी के बदायूं (Badaun) जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के धिमरपुरा गांव में हाईटेंशन लाइन (high-tension line) पर काम कर रहे युवक अरविंद यादव की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब युवक शटडाउन के बाद पोल पर चढ़कर कार्य कर रहा था, लेकिन अचानक लाइन में करंट दौड़ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा बेहद भयावह था, जिसमें युवक का शरीर बुरी तरह झुलस गया। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए गएग्रामीणों का कहना है कि शटडाउन के बावजूद सप्लाई चालू कर दी गई या तकनीकी गड़बड़ी के चलते करंट आया।

वहीं, घटना के दौरान मौजूद साथी युवक के फरार होने की बात भी सामने आई है। आस-पास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया

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नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार (Modi government) ने सभी सरकारी कर्मचारियों (central employees) को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) दो प्रतिशत बढ़ा दिया है। ये फैसला 1 जनवरी से लागू होगा। बढ़ती महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी कुछ राहत लेकर आई है। जानकारी के अनुसार सरकार ने DA 58% से बढ़कर 60% किया है। इस फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना 6,791 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार (18 अप्रैल) को दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक में इसका ऐलान किया गया। इससे लगभग 50.5 लाख कर्मचारियों और 68.3 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा। केंद्र सरकार साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बदलाव करती है। इस फैसले से कर्मचारियों की मंथली सैलरी और पेंशनर्स की पेंशन में इजाफा होता है।

महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला ‘कॉस्ट-ऑफ-लिविंग’ एडजस्टमेंट है। इसका कैलकुलेशन बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। इसका मुख्य मकसद बढ़ती कीमतों के बीच कर्मचारियों की वास्तविक आय की सुरक्षा करना है, ताकि उनकी सैलरी महंगाई के साथ तालमेल बिठा सके।

सरकार को सौंपे गए एक ज्ञापन में नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने वेतन में भारी बढ़ोतरी की मांग की है। इसमें न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखने की मांग शामिल है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो न्यूनतम मूल वेतन मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा वेतन ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगा। अन्य मांगों में 6 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि, एचआरए की न्यूनतम सीमा 30 प्रतिशत और पुरानी पेंशन योजनाओं की बहाली शामिल है।