– यूथ इंडिया समूह के संस्थापक शरद कटियार ने पीएम-सीएम को भेजा भावुक पत्र
– “दलाली नहीं की, सच लिखा… इसलिए बदनाम किया जा रहा”
– इस देश में सच्चाई और राष्ट्रधर्म की बात उठाना अब बेमानी!
– बैंक खाते, संपत्तियां और खुद के स्थापित मीडिया संस्थान की जांच की खुद उठाई मांग
– “निर्दोष मिला तो साजिशकर्ताओं को दिया जाये अवार्ड, हमें सजा ”
फर्रुखाबाद/लखनऊ/नई दिल्ली। “अगर मैं दोषी हूं तो मेरी सारी संपत्तियां जब्त कर मुझे जेल भेज दीजिए…” यह भावुक अपील किसी आरोपी की नहीं, बल्कि दो दशक से पत्रकारिता कर रहे “यूथ इंडिया” मीडिया समूह के संस्थापक एवं मुख्य संपादक शरद कटियार की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , मुख्य सचिव, डीजीपी और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजे गए विस्तृत पत्र में शरद कटियार ने अपनी और अपने पूरे परिवार की आर्थिक, बैंकिंग और संपत्ति संबंधी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि वर्ष 2003 से प्रकाशित “यूथ इंडिया” मीडिया समूह आज फर्रुखाबाद और लखनऊ से दैनिक समाचार पत्र के रूप में प्रकाशित हो रहा है और शीघ्र ही नई दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और उत्तराखंड से भी विस्तार की तैयारी में है। इसके अलावा मंथली मैगजीन, साप्ताहिक समाचार पत्र, डिजिटल प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल सहित यह एक संपूर्ण मीडिया हाउस बन चुका है, जिसे उन्होंने “अकेले संघर्ष और ईमानदार पत्रकारिता” से खड़ा किया।
पत्र में उन्होंने दावा किया कि अपने पूरे पत्रकारिता जीवन में उन्होंने कभी दलाली, ब्लैकमेलिंग या अवैध वसूली को कमाई का जरिया नहीं बनाया। इसके बावजूद कुछ नेता, प्रभावशाली लोग, अधिकारी और स्वार्थी तत्व लगातार उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि उनके सभी बैंक खातों, आयकर विवरण, लेन-देन और संपत्तियों की जांच कराई जाए। साथ ही “यूथ इंडिया” मीडिया समूह के आर्थिक स्रोतों और संचालन की भी निष्पक्ष जांच हो।
पत्र में उन्होंने भावुक अंदाज में लिखा कि उनके परिवार के पास फर्रुखाबाद स्थित पुश्तैनी मकान के अलावा कोई बड़ी संपत्ति नहीं है। उनकी 74 वर्षीय बुजुर्ग मां, पत्नी और 11 वर्षीय बेटी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “हमारे पास अकूत संपत्ति नहीं, केवल संघर्ष और आत्मसम्मान है।”
सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने खुद कहा कि यदि जांच में वे दोषी पाए जाते हैं तो उनकी संपत्तियां जब्त कर कठोर कार्रवाई की जाए। लेकिन यदि वे निर्दोष साबित हों तो उनकी छवि खराब करने वालों को भी चिन्हित कर कार्रवाई हो, ताकि ईमानदार पत्रकारिता का मनोबल टूटने न पाए।


