नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश को वर्ष 2047 तक पूर्ण रूप से नशा मुक्त बनाने का बड़ा संकल्प दोहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भारत में न तो एक ग्राम ड्रग्स प्रवेश करने दिया जाएगा और न ही देश से बाहर जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा एजेंसियां मादक पदार्थों के नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं।
नई दिल्ली में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) द्वारा आयोजित आरएन काओ स्मृति व्याख्यान-2026 को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि ड्रग्स केवल कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि यह समाज, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार से मिलने वाला पैसा आतंकवाद, संगठित अपराध और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को मजबूती देता है, इसलिए इसके खिलाफ कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रग सिंडिकेट और नार्को नेटवर्क को खत्म करने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत ने मित्र देशों के सहयोग से 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को वापस लाने में सफलता हासिल की है। शाह ने जोर देकर कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को भू-राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठाना होगा और दुनिया के सभी जिम्मेदार देशों को मिलकर साझा कानूनी ढांचा तथा खुफिया सहयोग विकसित करना होगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अभी वैश्विक स्तर पर सामूहिक कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। कार्यक्रम में 40 से अधिक देशों के राजदूत, सुरक्षा विशेषज्ञ, कूटनीतिज्ञ और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अमित शाह ने अंत में कहा कि “नशा मुक्त भारत” केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अहम होगी।


