– गो-आश्रयों में युद्धस्तर पर इंतजाम
– मुख्यमंत्री के आदेशों को धरातल पर उतारने की तैयारी
– सीएम के आदेश के तुरंत बाद एक्टिव हुईं मैडम’ लाठर ‘
फर्रुखाबाद। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जहां आम जनजीवन बेहाल है, वहीं प्रशासन ने मूक पशुओं की सुरक्षा को लेकर अभूतपूर्व संवेदनशीलता दिखाई है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने साफ संदेश दे दिया है गो-आश्रय स्थलों में एक भी पशु गर्मी से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आदेश नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी के तौर पर पूरे तंत्र को एक्टिव मोड में झोंक दिया गया है।
डीएम लाठर के निर्देशों के बाद जनपद के गो-आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं तेजी से दुरुस्त की जा रही हैं। वाटर मिस्टिंग सिस्टम, कूलर, पंखे और छायादार शेड अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर नजर आने लगे हैं। हर आश्रय स्थल पर स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निरीक्षण में लापरवाही मिली तो सीधी जवाबदेही तय होगी।
सबसे बड़ी चुनौती—चारा संकट—को लेकर भी डीएम ने रणनीतिक मोर्चा खोल दिया है। हरे चारे और भूसे की कमी न हो, इसके लिए जिला स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज किया गया है और खाली कराई गई जमीन पर हाइब्रिड नेपियर घास की बुआई कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
सूत्र बताते हैं कि प्रशासन अब ‘भूसा दान’ को जनआंदोलन बनाने की तैयारी में है। प्रदेश के कई जिले पहले ही इस अभियान में आगे निकल चुके हैं और फर्रुखाबाद को भी अग्रणी बनाने की रणनीति पर काम हो रहा है। समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों को जोड़कर गो-आश्रयों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद तेज हो गई है।
डीएम अंकुर लाठर की यह पहल सिर्फ प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल बनकर उभरी है। जहां एक ओर लू इंसानों के लिए चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का यह कदम यह साबित करता है कि व्यवस्था चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, अगर नेतृत्व इच्छाशक्ति दिखाए तो हर संकट से निपटा जा सकता है।
फिलहाल, फर्रुखाबाद में गो-आश्रयों की तस्वीर बदलती नजर आ रही है और यह बदलाव सीधे-सीधे डीएम की सख्ती और संवेदनशीलता का परिणाम माना जा रहा है।
लू के कहर में ‘गौसेवा’ का संकल्प: डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने संभाली कमान


