लखनऊ: सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के उद्देश्य से ‘सेफ्टी वीक 2026’ के तहत सीट बेल्ट के महत्व को लेकर सुएज द्वारा विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि एक छोटी-सी आदत—सीट बेल्ट लगाना—जीवन और मृत्यु के बीच बड़ा अंतर बना सकती है।
अभियान में आम धारणा (मिथ) और वास्तविकता (फैक्ट) के बीच का फर्क स्पष्ट किया गया है। अक्सर लोग मानते हैं कि दुर्घटना के समय सीट बेल्ट उन्हें वाहन में फंसा सकती है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि सीट बेल्ट तेजी से खुलने के लिए ही डिजाइन की जाती है और यह व्यक्ति को वाहन से बाहर फेंके जाने से बचाती है, जो अधिक खतरनाक होता है।
इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में कई लोग सीट बेल्ट को अनावश्यक समझते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार अचानक ब्रेक या फिसलन की स्थिति में बिना सीट बेल्ट के वाहन से बाहर फेंके जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यहां तक कि 30–40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर भी बिना सीट बेल्ट गंभीर या जानलेवा चोट लग सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुभवहीनता या अनुभव—दोनों ही दुर्घटनाओं को नहीं रोक सकते, लेकिन सीट बेल्ट चोट के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है।
इस अवसर पर सुएज के हेल्थ एंड सेफ्टी मैनेजर पंकज सिंह ने कहा कि हर व्यक्ति को यात्रा से पहले सीट बेल्ट अवश्य लगानी चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुएज लखनऊ में अपनी विभिन्न साइटों पर इस अभियान को सक्रिय रूप से चला रहा है और अपने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस विषय में जागरूक कर रहा है।
“सीट बेल्ट—एक क्लिक जो सब कुछ बदल दे,” यही संदेश इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।


