
शरद कटियार
5 जून केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक और सामाजिक यात्रा को स्मरण करने का अवसर भी है जिसने एक युवा संन्यासी को देश के सबसे बड़े राज्य का सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्री बना दिया। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में 5 जून 1972 को जन्मे अजय सिंह बिष्ट ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बनेंगे। लेकिन इतिहास उन्हीं लोगों का साथ देता है जो परिस्थितियों को बदलने का साहस रखते हैं।
गोरखनाथ पीठ में दीक्षा लेने के बाद अजय सिंह बिष्ट, योगी आदित्यनाथ के नाम से पहचाने जाने लगे। महंत अवैद्यनाथ के सान्निध्य में उन्होंने न केवल आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण की बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भाव भी सीखा। मात्र 26 वर्ष की आयु में वर्ष 1998 में पहली बार गोरखपुर से लोकसभा सांसद चुने गए और इसके बाद लगातार पांच बार संसद पहुंचे। यह उपलब्धि स्वयं में उनके जनाधार और लोकप्रियता का प्रमाण है।
वर्ष 2017 उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ लेकर आया। भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय उत्तर प्रदेश कानून व्यवस्था, निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसी अनेक चुनौतियों से जूझ रहा था। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और अनुशासन को प्राथमिकता दी।
योगी सरकार के पहले कार्यकाल में कानून व्यवस्था को लेकर व्यापक अभियान चलाए गए। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, माफिया नेटवर्क पर शिकंजा और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई राष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी। सरकार के अनुसार हजारों करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गईं और कई संगठित अपराध गिरोहों की आर्थिक कमर तोड़ी गई।
आर्थिक मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। वर्ष 2017 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगभग 12 से 13 लाख करोड़ रुपये के आसपास मानी जाती थी, जबकि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर लगभग 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने नई पहचान बनाई। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट प्रदेश के विकास मॉडल के प्रतीक बने। जेवर में बनने वाला नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जा रहा है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां 2017 से पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या सीमित थी, वहीं अब लगभग प्रत्येक मंडल में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
मार्च 2022 में योगी आदित्यनाथ ने एक और राजनीतिक इतिहास रचा। वह उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटने वाले पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति लंबे समय तक सत्ता परिवर्तन के लिए जानी जाती रही है।
दूसरे कार्यकाल में सरकार ने निवेश, रोजगार, औद्योगिक विकास और डिजिटल प्रशासन पर विशेष जोर दिया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। रक्षा गलियारा (डिफेंस कॉरिडोर), डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और औद्योगिक पार्कों जैसी परियोजनाओं ने उत्तर प्रदेश को निवेशकों की पसंदीदा मंजिल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हालांकि किसी भी लंबे राजनीतिक कार्यकाल की तरह योगी सरकार को भी आलोचनाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महंगाई और स्थानीय प्रशासनिक शिकायतें विपक्ष के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। लेकिन समर्थकों का तर्क है कि कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश के क्षेत्र में हुए बदलावों ने उत्तर प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है।
आज जब योगी आदित्यनाथ अपना जन्मोत्सव मना रहे हैं, तब उनकी यात्रा केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व के अनूठे संगम का उदाहरण भी है। महंत से मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय राजनीति के प्रभावशाली चेहरों में शामिल होने तक का उनका सफर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में दर्ज हो चुका है।


