तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह पर रोक का प्रावधान, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पूरे प्रदेश में होगा लागू
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने अपने प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून पूरे राज्य में लागू हो जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे सामाजिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व के मार्गदर्शन में राज्य सरकार समानता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
विधेयक के लागू होने के बाद राज्य में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। सरकार का दावा है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।
विधेयक में तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बहुविवाह (एक से अधिक विवाह) को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी और वैवाहिक संबंधों में समानता सुनिश्चित होगी।
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार के अनुसार यदि लिव-इन संबंधों का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी या कानून का उल्लंघन किया जाता है, तो ऐसे मामलों में पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान रखा गया है। संबंधित अपराधों की विस्तृत प्रक्रिया और परिभाषा कानून लागू होने के बाद अधिसूचित नियमों में स्पष्ट की जाएगी।
यूसीसी के तहत पैतृक संपत्ति में महिलाओं और बेटियों को पुरुषों के समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है। उत्तराधिकार, गोद लेने तथा पारिवारिक अधिकारों से जुड़े मामलों में भी समानता सुनिश्चित करने का दावा सरकार ने किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एक से अधिक विवाह की प्रथा से महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नया कानून लागू होने के बाद इस प्रकार की व्यवस्था पर रोक लगेगी और महिलाओं को न्याय व समान अधिकार प्राप्त होंगे।
विधानसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद इसे अधिसूचित कर पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके बाद राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों से जुड़े प्रावधान समान नागरिक संहिता के तहत संचालित होंगे।
यह विधेयक पारित होने के साथ मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। सरकार का दावा है कि इससे सामाजिक समानता, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और न्यायिक व्यवस्था में एकरूपता को बढ़ावा मिलेगा।


