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Thursday, June 4, 2026

राजपुताना होटल में फायर सेफ्टी भगवान भरोसे! क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है प्रशासन?

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– सजातीय मंत्रियों क्या आवा गमन के कारण प्रशासन रहता है नतमस्तक

– बगैर आईडी के राजनैतिक रसूख के यहां रुकते हैं कई संदिग्ध जो कानून व्यवस्था के लिए कभी भी बन सकते हैं खतरा : सूत्र

फर्रुखाबाद। शहर के चर्चित राजनैतिक आयोजन स्थलों में बढ़पुर के शामिल राजपुताना होटल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस चल रही है, स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि होटल परिसर में न तो पर्याप्त अग्निशमन उपकरण हैं और न ही आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी इंतजाम मौजूद हैं। ऐसे में यदि किसी समारोह के दौरान आग लग जाए तो सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। हालांकि होटल संचालक ठा. वीरेंद्र सिंह राठौर को सत्ता रुण भाजपा का सहारा है इसलिए यहां पर कोई भी जिम्मेदार हाथ डालने से बचता है। और खुद को भाई भारतीय जनता पार्टी का भोजपुर विधानसभा से प्रत्याशी मानते हैं। प्रदेश के कई उनके सजातीय मंत्री उनके होटल में जनपदीय भ्रमण के दौरान फ्री का खाना खाने आते हैं इस कारण जिम्मेदारों पर उनके दबाव पर्याप्त रहता माना जाता है।

राजपुताना होटल में नियमित रूप से राजनीतिक कार्यक्रमों समारोह, , क्षत्रिय समाज के सामाजिक आयोजन और बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर सैकड़ो लोगों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देने जैसा है।

देशभर में होटलों और बैंक्वेट हॉल में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी ) और विभिन्न अग्निशमन विभागों के आंकड़े बताते हैं कि हर वर्ष हजारों अग्निकांड दर्ज होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या होटलों, रेस्टोरेंटों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी होती है। अधिकांश मामलों में आग से ज्यादा जानें सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण जाती हैं।

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत और अन्य शहरों में हुए कई दर्दनाक अग्निकांडों की जांच रिपोर्टों में यह सामने आया कि भवनों में फायर एनओसी तो थी, लेकिन फायर एक्सटिंग्विशर निष्क्रिय पड़े थे, आपातकालीन निकास बंद थे या कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण तक नहीं दिया गया था। परिणामस्वरूप छोटी घटना कुछ ही मिनटों में भयावह त्रासदी में बदल गई।

जिले में भी सवाल यही उठ रहा है कि यदि राजपुताना होटल में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो रहा है तो इसकी नियमित जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? क्या अग्निशमन विभाग ने हाल के दिनों में यहां निरीक्षण किया है? यदि किया है तो क्या कमियां मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई हुई?

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तत्काल होटल की फायर सेफ्टी ऑडिट करानी चाहिए। यदि अग्निशमन उपकरण, स्मोक डिटेक्टर, आपातकालीन निकास और सुरक्षा मानकों में कोई कमी पाई जाती है तो नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि हादसे के बाद कार्रवाई करने से जानें वापस नहीं आतीं।

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