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Saturday, April 25, 2026

राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़ मंजूषा कला की सराहना की, कलाकार से की लंबी बातचीत

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भागलपुर। बिहार की पारंपरिक मंजूषा कला को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंसी’ कार्यक्रम के दौरान इस अनूठी कलाकृति की खुलकर सराहना की। मंजूषा कला से बनी साड़ी को देखते ही राष्ट्रपति उसकी रंग-सज्जा और बारीक कारीगरी से प्रभावित हो गईं और इसे विशेष कार्यक्रम में पहनने की इच्छा भी जताई।
कार्यक्रम के दौरान जब राष्ट्रपति ने इस साड़ी के कलाकार के बारे में पूछा तो भागलपुर के मंजूषा कला के प्रसिद्ध कलाकार मनोज पंडित को उनके सामने प्रस्तुत किया गया। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कलाकार को केवल दो मिनट का समय दिया जाना था, लेकिन राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए करीब सात मिनट तक उनसे विस्तार से बातचीत की।
इस दौरान राष्ट्रपति ने मंजूषा कला के इतिहास, इसके पारंपरिक रंगों और शैली के बारे में गहरी रुचि दिखाई। कलाकार ने बताया कि यह कला सातवीं शताब्दी से चली आ रही परंपरा है और इसमें मुख्य रूप से तीन रंगों का प्रयोग किया जाता है। राष्ट्रपति ने इस कला को “बेहतरीन” बताते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मनोज पंडित ने इस उपलब्धि का श्रेय स्थानीय प्रशासन और आम लोगों के सहयोग को दिया, जिनकी मदद से यह पारंपरिक कला राष्ट्रपति भवन तक पहुंच सकी। इस घटना के बाद भागलपुर सहित पूरे बिहार में खुशी का माहौल है और इसे राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का क्षण माना जा रहा है।

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