नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने एनटीए, शिक्षा व्यवस्था और हालिया घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को हटाने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और यहां तक कि केंद्रीय गृहमंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर दी। वो यह भी भूल गई कि देश के शीर्ष नेताओं का इस्तीफा मांग रही हैं और,उनके पति अखिलेश यादव जो कि अपने पिता के रहमों करम पर मुख्यमंत्री पद पर आसींन रहे अब तक विपक्ष में रहकर 10 वर्षों में पहली बार दिल्ली में गिरफ्तार होकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
डिंपल यादव ने कहा कि “एनटीए को हटाना चाहिए, नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।” इसके बाद उन्होंने हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि “क्या 20 जानें सरकार वापस ला सकती है?” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “धर्मेंद्र प्रधान के साथ गृहमंत्री का भी इस्तीफा चाहिए।”
उन्होंने संसद की कार्यवाही पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष चाहता है कि सदन चले, लेकिन सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और केवल नए विधेयक लाने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
भारतीय राजनीति में इस्तीफे की मांग अब विपक्ष का सबसे प्रभावी हथियार बन चुकी है। कभी किसी मंत्री का इस्तीफा, कभी किसी एजेंसी को खत्म करने की मांग और अब सीधे दो केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग,सियासत का ताप लगातार बढ़ता दिख रहा है। सवाल यह भी है कि क्या केवल इस्तीफों की मांग से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की चुनौतियों का समाधान होगा, या फिर व्यापक सुधारों पर ठोस चर्चा ज्यादा जरूरी है?


