प्रशासन अलर्ट, फसलों पर मंडराया संकट
फर्रुखाबाद। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने शमसाबाद तराई, कंपिल की कटरी और गंगापार क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि फिलहाल गंगा का जलस्तर 136.00 मीटर पर है, जो चेतावनी बिंदु से करीब 60 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन ऊपरी क्षेत्रों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण अगले 24 घंटे में जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर रामगंगा नदी अभी खतरे की स्थिति से दूर है और बिलो गेज पर बह रही है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ तटीय इलाकों में कटान भी तेज हो गया है। शमसाबाद क्षेत्र के समेचीपुर चितार, सैदपुर पिस्तौर, नगला बसोला, भगवानपुर, कटरी तौफीक, कासिमपुर तराई सहित कई गांवों के किसान और ग्रामीण दहशत में हैं। उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ और कटान से खेतों की उपजाऊ जमीन गंगा में समा जाती है, जिससे खेती और आजीविका पर संकट खड़ा हो जाता है। यदि जलस्तर में और बढ़ोतरी हुई तो खरीफ की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं और कई गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
सिंचाई विभाग के अनुसार हरिद्वार, नरौरा और बिजनौर बैराज से गंगा में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिसका असर फर्रुखाबाद में अगले एक-दो दिन में दिखाई दे सकता है। वहीं रामगंगा में बिजनौर, हरेली, खो और रामनगर बैराज से सीमित मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिससे फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा है।
प्रशासन ने संभावित बाढ़ को देखते हुए कंट्रोल रूम को सक्रिय कर दिया है। राजस्व, सिंचाई और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। सभी लेखपालों और राजस्व कर्मियों को संवेदनशील गांवों में निगरानी रखने तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल राहत कार्यों तक सीमित रहने के बजाय गंगा कटान और बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कटान रोकने के प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में किसानों की जमीन गंगा में समा सकती है और हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।


