अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। जांच से जुड़े घटनाक्रमों के बीच सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने पहले ही ट्रस्ट को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, एआई आधारित कैमरे लगाने और निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने की सलाह दी थी। आरोप है कि इन सुझावों को समय रहते लागू नहीं किया गया, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां बनी रहीं।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने चढ़ावे की गणना और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। इनमें एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे, सख्त निगरानी, तलाशी व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की सिफारिश शामिल थी। हालांकि, आरोप है कि तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों ने इन सिफारिशों पर पर्याप्त अमल नहीं किया। इस बीच एसआईटी की प्रारंभिक जांच में भी सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था में गंभीर चूक का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि सुरक्षा संबंधी सुझाव समय पर लागू किए गए होते, तो कथित चोरी की घटनाओं को रोका जा सकता था। मामले में पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से विभिन्न स्तरों पर अपने-अपने स्पष्टीकरण दिए गए हैं और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
उधर, चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी से जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब करने के साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से भी जवाब मांगा है।


