केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंक भर्ती में फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए पांच साल पुराने रिकॉर्ड की जांच की है। परीक्षा के दौरान जुटाए गए आंखों के स्कैन (आइरिस डेटा) के मिलान से 257 संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई। इनमें से 172 लोग अलग-अलग बैंकों में नौकरी कर रहे थे। एजेंसी अब देशभर में अन्य संदिग्ध कर्मचारियों की तलाश कर रही है।
जांच के मुताबिक, आरोपियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जीवाड़ा करके नौकरी हासिल की थी। CBI ने अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 135 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी पुराने परीक्षा रिकॉर्ड और बायोमेट्रिक डेटा के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
इस मामले में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में छापेमारी और कार्रवाई की गई है। मध्य प्रदेश में जांच के बाद एक ग्रामीण बैंक के 19 कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। संबंधित बैंकों को अपने सेवा नियमों के तहत आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) ने नौकरी कर रहे संदिग्धों समेत अन्य आरोपियों को भी आजीवन परीक्षा से प्रतिबंधित कर दिया है। मामले में दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। CBI फिलहाल मामले की जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है।


