एटा
जनपद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विशेष अदालत ने पति पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर उसे जेल भिजवाने वाली पत्नी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि कानून का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।
पूरा मामला वर्ष 2019 का है, जब थाना जैथरा क्षेत्र में एक महिला ने अपने पति पर नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस आरोप के चलते पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहां उसे करीब डेढ़ वर्ष तक कारावास में रहना पड़ा।
मामले की विवेचना और अदालत में सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि महिला ने पारिवारिक विवाद, खासतौर पर बेटी के बाल विवाह को लेकर हुए मतभेद के चलते अपने पति को फंसाने के उद्देश्य से यह झूठा आरोप लगाया था। बाद में अदालत में महिला ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने दूसरों के बहकावे में आकर गलत बयान दिया था।
मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश नरेंद्र पाल राणा ने अपने फैसले में कहा कि महिला ने निजी प्रतिशोध के लिए कानून का सहारा लिया और अपनी ही पुत्री को मोहरा बनाना अत्यंत निंदनीय कृत्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अशिक्षा किसी गंभीर अपराध के लिए बचाव का आधार नहीं हो सकती।
अदालत ने महिला को दोषी ठहराते हुए 30 दिन के साधारण कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही निर्देश दिया गया कि यदि अर्थदंड अदा नहीं किया गया तो अतिरिक्त सात दिन का कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी महिला को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।
इस फैसले को न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कानून का गलत इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे मामला कितना भी संवेदनशील क्यों न हो।


