41.6 C
Lucknow
Saturday, June 13, 2026

सबरीमाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज, आस्था बनाम अधिकार की बहस गहराई

Must read

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रही सुनवाई ने एक बार फिर देश में आस्था और संवैधानिक अधिकारों के बीच बहस को केंद्र में ला दिया है। यह मामला न सिर्फ धार्मिक परंपराओं बल्कि समानता और मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।

मंदिर का प्रबंधन देखने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि किसी धार्मिक प्रथा की वैधता का निर्णय उसी समुदाय की आस्था के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत को यह तय नहीं करना चाहिए कि धर्म के लिए क्या सही है और क्या गलत।

सिंघवी ने जोर देते हुए कहा कि धर्म मूल रूप से एक समुदाय की सामूहिक आस्था से जुड़ा होता है। ऐसे में कुछ व्यक्तियों के अधिकारों को पूरे धार्मिक समुदाय की परंपराओं पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। यह तर्क इस मामले में आस्था की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इससे पहले 7 से 9 अप्रैल तक चली सुनवाई में भी महिलाओं के प्रवेश के विरोध में कई पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि देश के कई मंदिरों में विशेष परंपराओं के तहत पुरुषों या महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

इस विवाद की जड़ 1991 के उस फैसले में है, जब केरल हाईकोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रतिबंध को भेदभावपूर्ण बताते हुए इसे हटा दिया था, जिससे देशभर में व्यापक बहस और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले।

2018 के फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं, जिनके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सात महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न तय किए हैं। इन प्रश्नों में धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और न्यायपालिका की सीमाओं जैसे मुद्दे शामिल हैं, जिन पर अब विस्तृत बहस जारी है।

यह मामला अब एक व्यापक संवैधानिक विमर्श का रूप ले चुका है, जिसमें यह तय होना है कि व्यक्तिगत अधिकार और धार्मिक परंपराएं किस हद तक एक-दूसरे के साथ संतुलन बना सकती हैं। अदालत का अंतिम फैसला न केवल सबरीमाला बल्कि देशभर में धार्मिक प्रथाओं से जुड़े कई मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article