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Monday, April 27, 2026
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शादी में जा रहे किसान की सड़क हादसे में मौत, परिवार में मचा कोहराम

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Kampil।
कंपिल क्षेत्र से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जहां शादी में शामिल होने जा रहे एक किसान की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और स्वजन बिलख उठे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, क्षेत्र के गांव हरकरनपुर निवासी लगभग 50 वर्षीय शिवपाल जाटव मंगलवार सुबह शाहजहांपुर जनपद के गांव मिर्जापुर में अपने साढ़ू की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए घर से निकले थे।
बताया जा रहा है कि दोपहर करीब 2 बजे कलान (शाहजहांपुर) मार्ग पर एक टेंपो की आमने-सामने से जोरदार भिड़ंत हो गई, जिसमें शिवपाल जाटव गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
राहगीरों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस की मदद से घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कलान पहुंचाया। जहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। स्वजन रो-रोकर बेहाल हो गए और तत्काल घटना स्थल के लिए रवाना हो गए।
मृतक शिवपाल जाटव खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके परिवार में चार पुत्र—उमेश, लंकुश, रमन, दुर्वेश—और एक पुत्री सुखरानी हैं। उनके असामयिक निधन से पूरे गांव में शोक की लहर है।

खागा में चाय दुकान विवाद के बाद सियासी माहौल गर्माया

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फतेहपुर
खागा तहसील क्षेत्र के चौकी चौराहे पर स्थित एक मशहूर चाय दुकान पर ग्राहक और दुकानदार के बीच हुए विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। मामूली कहासुनी के बाद शुरू हुई मारपीट की घटना ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
घटना के बाद मंगलवार शाम करीब 4 बजे समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश सचिव जगनायक सिंह के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने अल्पसंख्यक समुदाय के साथ एक बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में फैले तनाव को कम करना और स्थिति को नियंत्रित करना बताया गया। बैठक में नेताओं ने लोगों को समझाने और शांति बनाए रखने की अपील की।
इस बैठक में सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक मोहम्मद सफीर, पूर्व जिलाध्यक्ष वलीउल्ला सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह बैठक हुसैनगंज विधानसभा क्षेत्र के अफोई और मोहम्मदपुर गौती गांव में आयोजित की गई, जहां सैकड़ों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रदेश सचिव जगनायक सिंह ने बैठक के दौरान कहा कि क्षेत्र में किसी प्रकार का हिंदू-मुस्लिम विवाद नहीं है और कुछ लोग जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ तत्व इस घटना को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव का पुतला फूंकने वाले लोग पार्टी से जुड़े नहीं हैं।
सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि पुतला फूंकने की घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इशारों में भाजपा के पूर्व मंत्री धुन्नी सिंह पर भी आरोप लगाए और कहा कि उनके समर्थकों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, पूर्व जिलाध्यक्ष वलीउल्ला ने कहा कि अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग अब पहले से अधिक जागरूक हो चुका है और उन्हें किसी भी तरह से गुमराह नहीं किया जा सकता। पूर्व विधायक मोहम्मद सफीर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले जब अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई हुई थी तब कोई सामने नहीं आया, लेकिन अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले कुछ लोग भाजपा से जुड़े हैं, जिनके सोशल मीडिया प्रमाण मौजूद हैं।

असोथर में सड़क हादसा, जीजा-साला गंभीर रूप से घायल

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फतेहपुर
असोथर थाना क्षेत्र में मटिहा गांव के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें बाइक सवार जीजा और साला गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद दोनों को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, थरियांव थाना क्षेत्र के जयचंदापुर गांव निवासी 30 वर्षीय सोनू अपने साले महेंद्र (28), जो खागा कोतवाली क्षेत्र के जैदपुर गांव के रहने वाले हैं, के साथ दोपहर में बाइक से किसी काम के लिए निकले थे। दोनों सामान्य रूप से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे।

इसी दौरान जब उनकी बाइक असोथर थाना क्षेत्र के मटिहा गांव के पास पहुंची, तभी सामने से आ रहे एक चार पहिया वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार दोनों युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को असोथर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

जिला अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में दोनों का इलाज जारी है। परिजनों ने घटना को लेकर पुलिस को प्रार्थना पत्र सौंपा है और मामले में कार्रवाई की मांग की है। वहीं थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने 210 गुम मोबाइल बरामद कर मालिकों को लौटाए, 32 लाख की संपत्ति वापस मिली

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फतेहपुर
पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए गुम और चोरी हुए 210 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 32 लाख रुपये बताई गई है। मंगलवार को पुलिस लाइन के मनोरंजन कक्ष में एक कार्यक्रम आयोजित कर इन मोबाइलों को उनके असली मालिकों को वापस सौंपा गया।

ये सभी मोबाइल जिले के अलग-अलग भीड़भाड़ वाले स्थानों से गुम हुए थे या चोरी की घटनाओं में गायब हो गए थे। कई मामलों में मोबाइल गिर जाने की शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। मोबाइल मालिकों द्वारा संबंधित थानों में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी मदद से इनकी तलाश शुरू की थी।

जिले के विभिन्न थानों की संयुक्त कार्रवाई के बाद धीरे-धीरे सभी 210 मोबाइल ट्रेस कर बरामद कर लिए गए। इस अभियान में तकनीकी टीम और स्थानीय पुलिस की सक्रिय भूमिका रही, जिसके चलते बड़ी संख्या में मोबाइल वापस मिल सके।

मोबाइल वापस मिलने के बाद उनके मालिकों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई। कई लोगों ने बताया कि वे उम्मीद छोड़ चुके थे, लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई ने उन्हें बड़ी राहत दी है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि ये मोबाइल उनकी मेहनत की कमाई से खरीदे गए थे और नए फोन खरीदना उनके लिए आसान नहीं था।

इस मौके पर पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि बरामद किए गए मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 32 लाख रुपये है। उन्होंने कहा कि कई लोग ऐसे थे जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और मोबाइल खोने के बाद परेशान थे, इसलिए यह कार्रवाई उनके लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

एसपी ने आम जनता से अपील की कि यदि किसी का मोबाइल गुम या चोरी हो जाए तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि सर्विलांस सिस्टम की मदद से उसे जल्द से जल्द ट्रेस किया जा सके। कार्यक्रम में मोबाइल प्राप्त करने वालों में मीना देवी, राकेश कुमार और दानिश समेत कई लोग शामिल रहे, जिन्होंने पुलिस का आभार जताया।

राधानगर में फोटो कॉपी दुकान में आग, ढाई लाख का सामान जलकर राख

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फतेहपुर
राधानगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक फोटो कॉपी की दुकान में आग लगने से बड़ा नुकसान हो गया। इस घटना में लगभग ढाई लाख रुपये मूल्य का सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया। पीड़ित दुकान मालिक ने इसे सुनियोजित आगजनी बताते हुए कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

खंभापुर निवासी मोहम्मद सिराजुल हुसैन ने राधानगर थाने में दी गई तहरीर में बताया कि वह अपने साथी कमलापति विश्वकर्मा के साथ पुलिस लाइन के सामने फोटोकॉपी की दुकान चलाते थे। उनका आरोप है कि पास में स्थित एक अन्य दुकान के दो संचालक उनकी दुकान से रंजिश रखते थे और उन्हें पहले भी धमकियां दे चुके थे।

पीड़ित के अनुसार, मंगलवार तड़के करीब 3 बजे अज्ञात लोगों ने उनकी दुकान में आग लगा दी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में पूरी दुकान इसकी चपेट में आ गई। इस घटना में दो प्रिंटर, एक लैपटॉप, लैमिनेशन मशीन, इनवर्टर, बैटरी और सोलर पैनल सहित सभी उपकरण जलकर नष्ट हो गए।

मोहम्मद सिराजुल हुसैन ने यह भी दावा किया कि उनकी दुकान में बिजली का कनेक्शन नहीं था, जिससे शॉर्ट सर्किट की संभावना कम हो जाती है और आगजनी की आशंका और मजबूत होती है। फिलहाल घटना को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और दुकान का शटर खोला गया, लेकिन तब तक आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया था और सारा सामान जलकर राख हो चुका था।

राधानगर थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। आग लगने के वास्तविक कारणों की गहनता से जांच की जा रही है और यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संविदा कर्मचारियों के जरिए चल रहा था वसूली का खेल

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शाहजहांपुर। बीएसए कार्यालय में रिश्वतखोरी की परतें खुलने के साथ ही वसूली के एक संगठित तंत्र की चर्चा भी तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, संविदा कर्मचारियों के जरिए पूरे खेल को अंजाम दिया जाता था। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल में देरी से पहुंचने या अन्य प्रशासनिक खामियों को आधार बनाकर कार्रवाई का डर दिखाया जाता था, जिसके बाद सेटिंग के नाम पर पैसे की मांग की जाती थी। बताया जा रहा है कि इस तरीके से लंबे समय से शिक्षकों को दबाव में लेकर अवैध वसूली की जा रही थी, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

!!जिला समन्वयक की भूमिका पर उठे सवाल!!

मामले में जिला समन्वयक निश्चय सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) की निगरानी के साथ-साथ शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखने का अधिकार भी प्राप्त था। ऐसे में इस अधिकार का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा था या नहीं, यह जांच का विषय बन गया है। यह भी चर्चा है कि वह लंबे समय से एक ही जनपद में तैनात रहे, जिससे पूरे सिस्टम पर उनकी पकड़ मजबूत हो गई थी। अब एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई के बाद विभाग में खलबली मची है और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की मांग तेज हो गई है। फिलहाल, जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।