फतेहपुर
खागा तहसील क्षेत्र के चौकी चौराहे पर स्थित एक मशहूर चाय दुकान पर ग्राहक और दुकानदार के बीच हुए विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। मामूली कहासुनी के बाद शुरू हुई मारपीट की घटना ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
घटना के बाद मंगलवार शाम करीब 4 बजे समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश सचिव जगनायक सिंह के नेतृत्व में पार्टी नेताओं ने अल्पसंख्यक समुदाय के साथ एक बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्र में फैले तनाव को कम करना और स्थिति को नियंत्रित करना बताया गया। बैठक में नेताओं ने लोगों को समझाने और शांति बनाए रखने की अपील की।
इस बैठक में सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक मोहम्मद सफीर, पूर्व जिलाध्यक्ष वलीउल्ला सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह बैठक हुसैनगंज विधानसभा क्षेत्र के अफोई और मोहम्मदपुर गौती गांव में आयोजित की गई, जहां सैकड़ों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रदेश सचिव जगनायक सिंह ने बैठक के दौरान कहा कि क्षेत्र में किसी प्रकार का हिंदू-मुस्लिम विवाद नहीं है और कुछ लोग जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ तत्व इस घटना को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव का पुतला फूंकने वाले लोग पार्टी से जुड़े नहीं हैं।
सपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि पुतला फूंकने की घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इशारों में भाजपा के पूर्व मंत्री धुन्नी सिंह पर भी आरोप लगाए और कहा कि उनके समर्थकों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, पूर्व जिलाध्यक्ष वलीउल्ला ने कहा कि अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग अब पहले से अधिक जागरूक हो चुका है और उन्हें किसी भी तरह से गुमराह नहीं किया जा सकता। पूर्व विधायक मोहम्मद सफीर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले जब अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई हुई थी तब कोई सामने नहीं आया, लेकिन अब राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले कुछ लोग भाजपा से जुड़े हैं, जिनके सोशल मीडिया प्रमाण मौजूद हैं।
खागा में चाय दुकान विवाद के बाद सियासी माहौल गर्माया


