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Monday, April 27, 2026
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एएसपी अनुज चौधरी समेत पुलिसकर्मियों पर एफआईआर आदेश पर हाईकोर्ट की रोक जारी

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संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक फिलहाल जारी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। मंगलवार को सुनवाई उस कारण टल गई क्योंकि केस रजिस्टर्ड नंबर पर सूचीबद्ध नहीं हो सका।

यह मामला उस आदेश से जुड़ा है, जो संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर ने दिया था। इस आदेश में एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश को पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता यामीन की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर सीजेएम कोर्ट ने 9 जनवरी 2025 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद एएसपी अनुज चौधरी ने 29 जनवरी 2025 को इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अलग से याचिका दायर की।

इस मामले में पहले भी 10 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए सीजेएम के आदेश पर रोक लगा दी थी, जो अब भी प्रभावी है। इससे पहले 9 फरवरी 2025 को भी करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई थी।

पूरा मामला 6 फरवरी 2024 को दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें संभल निवासी यामीन ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे आलम को 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में पुलिस ने गोली मारी थी। इसी आधार पर उन्होंने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया था।

इसी बीच 24 नवंबर 2024 को संभल में उस समय हिंसा भड़क गई थी, जब मस्जिद के सर्वे को लेकर भारी भीड़ जमा हो गई और पथराव-फायरिंग की घटनाएं हुईं। इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हुई थी और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

इस मामले में अब तक 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमे हुए हैं। कई आरोपियों की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद कुछ को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत भी मिल चुकी है।

महिला की मौत के बाद अवैध क्लीनिक सील, स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई

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कासगंज

जनपद के ज्वालापुरी क्षेत्र में एक 65 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध क्लीनिक को सील कर दिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, महिला का उपचार एक निजी क्लीनिक में किया जा रहा था, जहां इलाज के दौरान ही उसकी हालत बिगड़ गई और मौत हो गई। मामले की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और क्लीनिक की गहन जांच की गई। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम का नेतृत्व कर रहे चिकित्सक डॉ. कुंवर उत्कर्ष ने बताया कि क्लीनिक में न तो उपचार से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मिले और न ही आवश्यक पंजीकरण के प्रमाण प्रस्तुत किए जा सके। इसके अलावा क्लीनिक में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब पाई गई और मौके पर कोई प्रशिक्षित स्टाफ भी मौजूद नहीं था, जो स्वास्थ्य मानकों की खुली अनदेखी को दर्शाता है।
इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से क्लीनिक को सील कर दिया। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अपंजीकृत और संदिग्ध चिकित्सा संस्थान में इलाज कराने से बचें तथा केवल अधिकृत और पंजीकृत अस्पतालों में ही उपचार कराएं।
इस घटना ने एक बार फिर जनपद में अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की समस्या को उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

दूधिया की मौत पर बवाल: आक्रोशित ग्रामीणों का पुलिस पर पथराव, जीटी रोड घंटों जाम

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एटा

जनपद के सकीट थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब घायल दूधिया की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मौके पर जमकर हंगामा करते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने शव को जीटी रोड पर रखकर जाम लगा दिया, जिससे इलाके में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
मिली जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद जनपद के एका थाना क्षेत्र के नगला गड़रिया निवासी 23 वर्षीय बबलू, जो पेशे से दूध का कारोबार करते थे, अपनी ससुराल कर्मचंदपुर जा रहे थे। इसी दौरान नोकसपुर गांव के पास किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस करीब दो घंटे की देरी से पहुंची।
घायल युवक को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने पहले घटनास्थल पर पुलिस पर पथराव किया और बाद में शव को जीटी रोड पर रखकर जाम लगा दिया। इस दौरान शहर कोतवाली इंस्पेक्टर प्रेमपाल सिंह सहित कई पुलिसकर्मियों से हाथापाई भी की गई।
स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन को भारी पुलिस बल और पीएसी बुलानी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को आश्वासन दिया कि एंबुलेंस की देरी के मामले की जांच कराई जाएगी।
जाम के कारण सैकड़ों वाहन जीटी रोड पर फंस गए, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई बारातें भी इस जाम में फंसी रहीं, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बाद में पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग से वाहनों को निकलवाया।
वहीं एंबुलेंस कर्मियों का कहना है कि वे समय पर पहुंचे थे, लेकिन मौके पर भारी भीड़ और पथराव के कारण सीधे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके। अतिरिक्त पुलिस बल आने के बाद ही वे घायल को लेने पहुंचे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है और हादसे में शामिल अज्ञात वाहन की तलाश जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है, जबकि प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

आईएएस अरविंद सिंह एटा के नए जिलाधिकारी

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प्रशासनिक फेरबदल में मिली बड़ी जिम्मेदारी

एटा

शासन द्वारा किए गए ताजा प्रशासनिक फेरबदल में 2015 बैच के आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को एटा जनपद का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। उनके नाम की घोषणा होते ही जिले के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और जल्द ही उनके कार्यभार ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है।
अरविंद सिंह इससे पहले लखनऊ में सहायक भू-लेख आयुक्त के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशासनिक अनुभव और कार्यशैली के चलते उन्हें एटा जैसे महत्वपूर्ण जिले की कमान सौंपी गई है।
शैक्षिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अरविंद सिंह ने वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने लखनऊ से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी किया है। तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों की समझ उन्हें प्रशासनिक कार्यों में एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करती है।
पूर्व में वे बलरामपुर जिले के जिलाधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उनके कार्यकाल को प्रभावी प्रशासन और विकास कार्यों के लिए सराहा गया। अब एटा में उनकी तैनाती को लेकर स्थानीय स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि वे जिले में विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।
वहीं वर्तमान जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह, जिनका कार्यकाल एटा में करीब ढाई वर्ष रहा, का तबादला कर उन्हें अपर राज्य परियोजना निदेशक, सर्व शिक्षा अभियान (मध्याह्न भोजन अभिकरण) के पद पर भेजा गया है। उनके कार्यकाल में जिले में कई विकास योजनाओं को गति मिली और प्रशासनिक स्तर पर कई अहम पहल की गईं।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई दिनों से जिले में डीएम के तबादले की चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर अब मुहर लग गई है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने नए जिलाधिकारी से बेहतर प्रशासन और जनहित में प्रभावी निर्णयों की अपेक्षा जताई है।

विशेष टीकाकरण अभियान शुरू: डीपीटी-टीडी वैक्सीन से बच्चों को तीन घातक बीमारियों से मिलेगा सुरक्षा कवच

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एटा

जनपद में बच्चों को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष डीपीटी-टीडी टीकाकरण अभियान की शुरुआत कर दी गई है। यह अभियान 30 अप्रैल तक संचालित किया जाएगा, जिसमें हजारों बच्चों को उम्र के अनुसार टीके लगाए जाएंगे। अभियान का शुभारंभ प्रिंटिस गर्ल्स इंटर कॉलेज में मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की उपस्थिति में किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डीपीटी एक संयुक्त वैक्सीन है, जो डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी) और टिटनेस जैसी तीन खतरनाक बीमारियों से बच्चों को सुरक्षा प्रदान करती है। यह टीका शिशुओं को निर्धारित समय—छह, 10 और 14 सप्ताह पर दिया जाता है, जबकि बाद में बूस्टर डोज भी दी जाती है। वहीं टीडी वैक्सीन में टिटनेस और डिप्थीरिया से बचाव होता है, जो बड़े बच्चों, किशोरों और वयस्कों के लिए उपयोगी है। इसे खासतौर पर 10 और 16 वर्ष की आयु में बूस्टर के रूप में लगाया जाता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. राम सिंह ने बताया कि समय पर टीकाकरण न होने से बच्चों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जबकि नियमित टीकाकरण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों का टीकाकरण समय पर अवश्य कराएं, ताकि उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, जनपद में डीपीटी के तहत 8692 बच्चों, टीडी (10 वर्ष आयु वर्ग) के लिए 15908 और टीडी (16 वर्ष आयु वर्ग) के लिए 10304 बच्चों को टीकाकरण किया जाएगा। यह अभियान उन बच्चों तक भी पहुंचेगा, जो किसी कारणवश अब तक इन जरूरी टीकों से वंचित रह गए हैं।
इसके अलावा विभाग ने एचपीवी टीकाकरण के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है, जो गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह टीकाकरण मेडिकल कॉलेज और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यापक अभियान के जरिए न केवल बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकेगा, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में गंभीर रोगों की रोकथाम संभव हो सकेगी।

कलेक्ट्रेट में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का धरना, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जताई नाराजगी

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हमीरपुर
कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कर्मचारी पेंशनर्स संघ के बैनर तले किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पेंशनर्स शामिल हुए और अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज उठाई।

धरने के दौरान पेंशनर्स ने पुरानी पेंशन बहाली समेत 10 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपने की कोशिश की, लेकिन जिलाधिकारी के कार्यालय में मौजूद न होने के कारण ज्ञापन नहीं दिया जा सका।

पेंशनर्स कलेक्ट्रेट के गोल चबूतरे पर एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि आठवें वेतन आयोग में पुराने पेंशनर्स को भी शामिल किया जाए और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए।

पेंशनर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष श्यामचरण साहू ने कहा कि वे लोग ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन जिलाधिकारी अनुपस्थित थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान अपर जिलाधिकारी और एसडीएम वहां से गुजरे, लेकिन उन्होंने रुककर ज्ञापन लेना उचित नहीं समझा।

इसी तरह जिला उपाध्यक्ष रघुवर प्रसाद ने कहा कि अगर जिलाधिकारी मौजूद नहीं थे तो कम से कम अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन स्वीकार करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि यह ज्ञापन प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा जाना था, जिसमें पेंशनर्स की प्रमुख मांगें शामिल थीं।

धरना दे रहे पेंशनर्स ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि इससे वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है। उनका आरोप है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।