इटावा/सैफई। सैफई स्थित मेडिकल विश्वविद्यालय से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें कथित अपहरण और दुष्कर्म की कहानी पुलिस जांच में झूठी साबित होने का दावा किया गया है। पुलिस ने मामले में विश्वविद्यालय की एक महिला कर्मचारी सरिता यादव और उसके कथित सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक शिकायत में एक युवक पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी की। लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई तथ्य शिकायत में दर्ज घटनाक्रम से मेल नहीं खाए।
सूत्रों के मुताबिक तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि जिस युवक पर आरोप लगाए गए थे, वह कथित घटना के समय शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए क्षेत्र में मौजूद ही नहीं था। जांच में सामने आए तथ्यों के बाद पुलिस का शक शिकायतकर्ता और उसके सहयोगियों पर गया।
पुलिस का दावा है कि विस्तृत जांच में अपहरण और दुष्कर्म की कहानी संदिग्ध पाई गई। इसके बाद मामले की परतें खुलती चली गईं और कथित साजिश का खुलासा हुआ। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आर्थिक लाभ, ब्लैकमेलिंग, वसूली या कोई अन्य उद्देश्य था।
मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना कितना खतरनाक हो सकता है। यदि जांच में आरोप झूठे साबित होते हैं तो इससे न केवल कानून व्यवस्था पर दबाव पड़ता है, बल्कि निर्दोष लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।


