लखनऊ/देहरादून: उत्तर प्रदेश फ़ूड सेफ़्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) और गाज़ियाबाद क्राइम ब्रांच (Ghaziabad Crime Branch) की एक संयुक्त टीम ने देहरादून (Dehradun) में नकली दवा बनाने वाली एक यूनिट का भंडाफोड़ किया है और 5 से 7 करोड़ रुपये की नकली दवाएं ज़ब्त की हैं। यह रेड देहरादून में न्यू हाईवे रोड पर देवी पुर इलाके में स्थित एक फ़ैक्टरी में की गई, जहाँ कई बड़ी फ़ार्मास्युटिकल कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाई जा रही थीं।
अधिकारियों के अनुसार, यह यूनिट सिप्ला, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़, एल्डर, माइक्रो लैब्स, मैनकाइंड फ़ार्मा, इंटास फ़ार्मास्युटिकल्स, एबॉट, सन फ़ार्मा, एरिस्टो फ़ार्मास्युटिकल्स, मैकलियोड्स फ़ार्मास्युटिकल्स और ज़ाइडस लाइफ़साइंसेज़ जैसी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल करके नकली दवाएं बना रही थी। इन नकली दवाओं को बाज़ार में असली उत्पादों के तौर पर बेचने की योजना थी।
अधिकारियों ने बताया कि ज़ब्त किए गए सामान की कीमत 5 से 7 करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान है। ज़ब्त किए गए स्टॉक की गिनती, जांच और ज़ब्ती की प्रक्रिया चल रही है।
FSDA के संयुक्त आयुक्त ब्रजेश कुमार ने बताया कि यह छापेमारी उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। उन्होंने कहा कि लखनऊ और गाज़ियाबाद समेत कई ज़िलों में पहले की गई छापेमारी से अधिकारियों को देहरादून स्थित इस यूनिट का पता चला।
अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि फैक्ट्री में बनी नकली दवाएं एक संगठित अंतर-राज्यीय वितरण नेटवर्क के ज़रिए उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में सप्लाई की जा रही थीं। इस रैकेट में शामिल लोगों की पहचान करने और सप्लाई चेन का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।


