
शरद कटियार
गर्मी के मौसम में सड़क किनारे, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में लाखों बोतल पैक पानी खुले आसमान के नीचे बिकता दिखाई देता है। चिलचिलाती धूप में घंटों रखी ये बोतलें लोगों को राहत तो देती हैं, लेकिन क्या वास्तव में यह पानी उतना ही सुरक्षित है जितना हम समझते हैं? यह सवाल अब वैज्ञानिक शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनियों के बाद गंभीर होता जा रहा है।
भारत में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बिक्री लगातार बढ़ रही है। लोग नल के पानी की अपेक्षा बोतलबंद पानी को अधिक सुरक्षित मानते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि दुकानों के बाहर पानी की पेटियां सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में रहती हैं। कई बार तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है। ऐसे में प्लास्टिक की बोतलों की गुणवत्ता और उनमें भरे पानी की सुरक्षा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक की बोतलों को सीधे धूप और अत्यधिक गर्मी से बचाकर रखना चाहिए। यही कारण है कि अधिकांश कंपनियां अपने लेबल पर स्पष्ट रूप से लिखती हैं कि बोतल को ठंडी, साफ और सूखी जगह पर रखा जाए तथा सीधे सूर्य प्रकाश से दूर रखा जाए। इसके बावजूद बाजारों में इस नियम का खुलेआम उल्लंघन देखने को मिलता है।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने पर प्लास्टिक की संरचना प्रभावित हो सकती है। इससे सूक्ष्म प्लास्टिक कण यानी माइक्रोप्लास्टिक पानी में मिलने की आशंका बढ़ जाती है। हाल के वर्षों में दुनिया भर में हुए अध्ययनों ने यह संकेत दिया है कि बोतलबंद पानी में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हो सकते हैं। ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर के भीतर पहुंचकर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोप्लास्टिक का लंबे समय तक शरीर में प्रवेश सूजन, हार्मोनल असंतुलन, हृदय रोगों और कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी व्यापक वैज्ञानिक शोध जारी है, लेकिन उपलब्ध संकेत चिंताजनक हैं। यही वजह है कि विकसित देशों में भी प्लास्टिक प्रदूषण को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उभरते खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
भारत में भारतीय मानक ब्यूरो और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड पानी की गुणवत्ता के लिए नियम बनाए हैं। इनमें पानी की शुद्धता, बैक्टीरिया की अनुपस्थिति और रासायनिक तत्वों की सीमा तय की गई है। लेकिन वास्तविक चुनौती भंडारण और परिवहन की है। यदि बोतलें निर्माण के बाद लंबे समय तक धूप में रखी जाएं, तो उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
विडंबना यह है कि जिस पानी को लोग स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए खरीदते हैं, वही पानी गलत तरीके से संग्रहित होने पर चिंता का विषय बन सकता है। बाजारों में धूप में रखी पानी की बोतलों पर शायद ही कभी किसी की नजर जाती हो। न उपभोक्ता सवाल पूछता है और न ही अधिकांश दुकानदार इस जोखिम को गंभीरता से लेते हैं।
अब समय आ गया है कि प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और उपभोक्ता सभी इस मुद्दे को गंभीरता से लें। पानी बेचने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद सही परिस्थितियों में संग्रहित और वितरित हों। साथ ही उपभोक्ताओं को भी धूप में लंबे समय तक रखी हुई या अत्यधिक गर्म बोतलों को खरीदने से बचना चाहिए।
स्वच्छ पानी हर नागरिक का अधिकार है। लेकिन यदि वही पानी धूप में तपकर प्लास्टिक के प्रभाव को अपने भीतर समेटने लगे, तो यह केवल उपभोक्ता का नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी बड़ा सवाल बन जाता है। इसलिए अगली बार जब आप बोतलबंद पानी खरीदें, तो केवल ब्रांड और सील ही नहीं, यह भी देखें कि वह बोतल कहां और कैसे रखी गई है।फोटो कैप्शन:
“तेज धूप में रखी पानी की बोतलें स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिक गर्मी प्लास्टिक से जुड़े जोखिमों को बढ़ा सकती है।”


