परिसीमन से जोड़ने पर बढ़ा विवाद, विपक्ष का विरोध और सरकार का समर्थन तेज
नई दिल्ली
संसद में महिला आरक्षण और संविधान संशोधन विधेयक को लेकर शुक्रवार को तीखी बहस देखने को मिली, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच स्पष्ट टकराव सामने आया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का विरोध करेगी और इसे पास नहीं होने देगी। वहीं लोकसभा में भी विभिन्न दलों के सांसदों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
कांग्रेस सांसद हैबी ईडन ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसे परिसीमन के एजेंडे के साथ जोड़ा गया है, जो उचित नहीं है। उनका मानना है कि महिला आरक्षण को सीधे लागू किया जाना चाहिए, न कि इसे अन्य प्रक्रियाओं से जोड़कर विलंबित किया जाए। इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि 2023 में यह बिल सर्वसम्मति से पास हुआ था, लेकिन अब इसमें बदलाव क्यों किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब महिला आरक्षण कानून अभी तक लागू ही नहीं हुआ, तो उसमें संशोधन का क्या औचित्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उनके बयान के दौरान सदन में शोर-शराबा भी देखने को मिला, जिसे बाद में पीठासीन अध्यक्ष ने शांत कराया।
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इस विधेयक का जोरदार समर्थन किया गया। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि देश की आधी आबादी की नजरें इस बिल पर टिकी हैं और यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से लंबित इस मुद्दे को अब वास्तविक रूप देने का समय आ गया है।
जदयू सांसद ललन सिंह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बिल जल्दबाजी में नहीं लाया गया, बल्कि लंबे समय से इसकी मांग रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे हठधर्मिता छोड़कर महिलाओं के हित में इस विधेयक का समर्थन करें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के सामाजिक सुधारों का विरोध करने वालों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि महिला आरक्षण का वादा लंबे समय से किया जा रहा है और अब इसे लागू करने में और देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मौजूदा संसद में ही महिलाओं को आरक्षण दिया जाए, ताकि इसका लाभ तुरंत मिल सके।


