प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के एक भूमि विवाद से जुड़े मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को निरस्त करते हुए पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने पाया कि मूल रूप से दीवानी प्रकृति के विवाद को गैंगस्टर एक्ट के दायरे में लाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तत्कालीन गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर एवं वर्तमान प्रयागराज रेंज के आईजी अजय मिश्रा द्वारा गैंग चार्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने में अपेक्षित सावधानी और स्वतंत्र मूल्यांकन पर प्रश्न उठते हैं।
कोर्ट ने आरोपी राजेंद्र त्यागी एवं उनके परिजनों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत की गई कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानून के प्रावधानों का उपयोग पूरी सतर्कता और स्थापित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि मामले से प्रभावित एक महिला को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को अपने अधिकारों का प्रयोग करते समय कानून, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। न्यायालय ने भविष्य के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को अधिक संतुलित, निष्पक्ष और विधिसम्मत निर्णय लेने की नसीहत दी।
हालांकि न्यायालय ने संबंधित अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड और करियर को ध्यान में रखते हुए किसी कठोर व्यक्तिगत टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जवाबदेही और कानूनी प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है।


