फर्रुखाबाद। जनपद में मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिले में पंजीकृत 300 से अधिक अस्पतालों में से करीब 250 अस्पतालों के पास ही फायर विभाग की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) उपलब्ध है, जबकि कई अस्पताल बिना वैध फायर एनओसी के ही संचालित किए जा रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान लगभग 80 प्रतिशत अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा से जुड़ी गंभीर खामियां पाई गईं। कई अस्पतालों में आग बुझाने वाले उपकरण या तो खराब मिले या उनकी समय-समय पर जांच नहीं कराई गई थी। कई स्थानों पर इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म सिस्टम और आपदा की स्थिति में निकासी की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली।
सबसे गंभीर बात यह है कि जिन अस्पतालों में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। यदि किसी अस्पताल में आग लगने जैसी घटना हो जाए तो मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
सूत्रों के अनुसार शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कई निजी अस्पतालों को खामियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। अग्निशमन विभाग ने ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी कर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी है। समय रहते सुधार न करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक?
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाले अस्पताल यदि बुनियादी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है। देश के कई अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सबक नहीं लिया जा रहा।


