– बहुमूल्य करोड़ों की संपत्तियाँ चट किये जा रहे नेता जी और वकील साहब,
– अनजान मंत्री जयवीर सिंह,प्रशासन मौन
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर धार्मिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक संस्थाओं की संपत्तियों को सुरक्षित रखने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर फर्रुखाबाद में दशकों पुराने ट्रस्टों और शैक्षणिक संस्थाओं की बहुमूल्य संपत्तियों पर कथित कब्जों के आरोप गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग से जुड़े हैं, तब भी सार्वजनिक ट्रस्टों की संपत्तियां विवादों में क्यों घिर रही हैं?
शहर के त्रिपोलिया चौक स्थित संस्कृत सावित्री पाठशाला का मामला फिर चर्चा में है। लोगों का दावा है कि यह संस्थान वर्षों तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से संबद्ध रहा। बताया जाता है कि संस्थान की मूल शर्तों में उल्लेख था कि जब तक यहां संस्कृत शिक्षा संचालित होगी, तब तक संपत्ति सार्वजनिक उपयोग में रहेगी और संस्था बंद होने की स्थिति में संपत्ति विश्वविद्यालय अथवा निर्धारित प्राधिकरण के अधीन जाएगी। लेकिन अब पाठशाला बंद होने के बाद इस बहुमूल्य भूमि और भवन पर कथित कब्जों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि परिसर के विभिन्न हिस्सों पर निजी निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं।
इसी प्रकार रेलवे रोड स्थित लाला लक्ष्मी नारायण मेमोरियल ट्रस्ट की संपत्ति भी विवादों के फिर केंद्र में है। ट्रस्ट की जमीन और भवन को लेकर वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक विवाद चल रहे हैं। बताया जाता है कि इस मामले में पूर्व में राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई भी की गई थी और मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बावजूद ट्रस्ट की संपत्ति पर निर्माण, नक्शा स्वीकृति और व्यावसायिक उपयोग को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि संबंधित ट्रस्ट के पदेन पदाधिकारियों में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका निर्धारित होने के बावजूद यदि संपत्तियों का स्वरूप बदल रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। आरोप यह भी हैं कि राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक उदासीनता और कानूनी पेचीदगियों का लाभ उठाकर सार्वजनिक संपत्तियों को धीरे-धीरे निजी नियंत्रण में लेने की कोशिश की जा रही है।
मामले को और गंभीर बनाता है रेलवे रोड स्थित ट्रस्ट की अन्य शाखाओं का विवाद, जहां पहले से कब्जों के आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो करोड़ों रुपये मूल्य की सार्वजनिक संपत्तियां हमेशा के लिए निजी हाथों में चली जाएंगी।
वरिष्ठ समाजसेवी सुधांशु दत्त द्विवेदी ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, ट्रस्टों की मूल अभिलेखों की समीक्षा करने तथा सार्वजनिक संपत्तियों की वर्तमान स्थिति का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि आरोप सही हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।


