लखनऊ
महिला आरक्षण बिल को लेकर देश और उत्तर प्रदेश की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। बिल के अब तक पूरी तरह लागू न होने पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। इसी मुद्दे को लेकर राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने लखनऊ में विधानभवन के सामने देर रात विरोध प्रदर्शन किया और समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के झंडे जलाए।
अपर्णा यादव ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण महिला आरक्षण बिल लंबे समय से अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए यह कदम जरूरी है और इस मुद्दे पर अब जनता को जागरूक होना चाहिए। इस दौरान महिला आयोग की कुछ अन्य सदस्यों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने इस विरोध पर पलटवार किया है। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जिनके पास 12 करोड़ महिलाओं वाला प्रदेश है, वे प्रदर्शन के लिए “कम से कम 12 महिलाएं” भी ठीक से नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्होंने इस प्रदर्शन को राजनीतिक दिखावा बताया।
सरकार की ओर से उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद से महिलाओं को उनका वाजिब हक पूरी तरह नहीं मिला, लेकिन अब केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इस बिल का विरोध करने वालों को जनता आगामी समय में जवाब देगी।
महिला आरक्षण बिल को लेकर चल रहा यह विवाद अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि जनभावनाओं से भी जुड़ता जा रहा है। एक पक्ष इसे महिलाओं के अधिकार की लड़ाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा मान रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी बड़े प्रदर्शन और बयानबाजी की संभावना जताई जा रही है।


