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Sunday, June 21, 2026

प्रतिबंध के बावजूद बरगदिया घाट पर धड़ल्ले से मत्स्य दोहन

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विभागीय संरक्षण के आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल

फर्रुखाबाद। शासन द्वारा मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए 1 जून से 31 अगस्त तक नदियों, नालों और तालाबों में मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के बरगदिया घाट पर इस आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद बड़े पैमाने पर मछलियों का शिकार कराया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बना हुआ है। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों और स्थानीय मछुआरों के अनुसार बाकरगंज निवासी मिथुन पुत्र गोपाल बाथम प्रतिबंध अवधि में भी मछली पकड़वाने का कार्य करवा रहा है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लगातार मत्स्य दोहन किया जा रहा है, जिससे जलीय जीवों के संरक्षण की सरकारी नीति पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब पूरे प्रदेश में मत्स्य संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है, तब बरगदिया घाट पर खुलेआम जाल डालकर मछलियां पकड़ी जा रही हैं।
मामले को और गंभीर बनाते हुए स्थानीय लोगों ने विभागीय मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मिथुन जिला पूर्ति अधिकारी की गाड़ी चलाता है, जिसके चलते उसे संरक्षण प्राप्त है और इसी कारण उसके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आम व्यक्ति प्रतिबंध का उल्लंघन करे तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन प्रभावशाली लोगों पर नियम लागू होते नहीं दिख रहे हैं।
मौके पर मौजूद मछुआरों ने भी बताया कि वे मिथुन के बड़े भाई प्रवास के कहने पर मछली पकड़ रहे हैं। उनके अनुसार पूरे कार्य का संचालन और लेन-देन प्रवास द्वारा किया जाता है। चर्चा है कि प्रवास स्वयं सरकारी कर्मचारी है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल अवैध मत्स्य शिकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ जाएगी।
गौरतलब है कि मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 1 जून से 31 अगस्त तक मछलियों के प्रजनन काल के दौरान किसी भी जलाशय में मत्स्य आखेट पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इस अवधि में मछली पकड़ते पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि यह कदम जलीय जीवों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इसके बावजूद बरगदिया घाट से सामने आ रही तस्वीरें और स्थानीय लोगों के आरोप यह संकेत दे रहे हैं कि जमीनी स्तर पर सरकारी आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया जा रहा। क्षेत्रवासियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रतिबंध अवधि में ही मछलियों का दोहन जारी रहा तो संरक्षण अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाएगा और शासन की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा। फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों के बीच संदेह और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

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