अयोध्या। राम मंदिर में प्राप्त दान और उसकी गणना प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि दान गणना (डोनेशन काउंटिंग) और निगरानी के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का अपेक्षित स्तर पर पालन नहीं हुआ।
नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार दान की गिनती और उसकी निगरानी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए थे, लेकिन उनका समुचित अनुपालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि निगरानी व्यवस्था के तहत दिए गए निर्देशों का पालन 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हुआ, जो गंभीर चिंता का विषय है।
उनके इस बयान के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सूत्रों के अनुसार दान गणना प्रक्रिया में लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरियों को जांच एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं। इसी कारण काउंटिंग प्रक्रिया से जुड़े कई पहलू विशेष जांच दल (SIT) की जांच के दायरे में हैं।
मामले में सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, काउंटिंग रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि निर्धारित नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही हैं ताकि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने लाई जा सके।
फिलहाल जांच जारी है और अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। श्रद्धालुओं और आम जनता की निगाहें अब जांच के परिणाम पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि दान गणना प्रक्रिया में वास्तव में लापरवाही हुई थी या नहीं।


