मोहम्मद आकिब खांन, यूथ इंडिया
नई दिल्ली: इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) का सांस्कृतिक कार्य विभाग 12 अगस्त को ‘विश्व हाथी दिवस’ के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन करने जा रहा है। ‘द रॉयल पैकीडर्म: द न्यूमिस्मैटिक जर्नी ऑफ द एशियन एलिफेंट’ शीर्षक से आयोजित इस व्याख्यान में दक्षिण एशिया की सिक्का-निर्माण और मुद्रा परंपराओं में एशियाई हाथी के ऐतिहासिक सफर को उजागर किया जाएगा। लोधी एस्टेट स्थित इंटेक मुख्यालय में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम संस्था की चल रही ‘गज-लोक’ पहल का ही एक प्रमुख हिस्सा है।
इस विशेष व्याख्यान के माध्यम से यह दर्शाया जाएगा कि किस प्रकार एशियाई हाथी सदियों से दक्षिण एशियाई संस्कृति, राजनीति और धार्मिक चेतना का मुख्य केंद्र रहे हैं। प्राचीन काल में हाथियों को राजसी वैभव, प्रभुत्व और युद्ध कौशल के प्रतीक के रूप में सिक्कों पर उकेरा जाता था। इसके साथ ही हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में हाथी को एक पवित्र जीव के रूप में पूजनीय माना गया है, जिसकी स्पष्ट झलक ऐतिहासिक मुद्राओं पर साफ दिखाई देती है। सत्र के दौरान विभिन्न कालखंडों के सिक्कों के जरिए हाथियों के राजनीतिक महत्व और कलात्मक रूपांकनों के क्रमिक विकास को प्रस्तुत किया जाएगा।
इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध इतिहासकार और राष्ट्रीय अभिलेखागार के पूर्व उप निदेशक डॉ. संजय गर्ग होंगे। डॉ. गर्ग आर्थिक व मौद्रिक इतिहास, सिक्का विज्ञान, वास्तुकला और अभिलेखागार अध्ययन के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में चार दशकों से अधिक का वृहद अनुभव रखने वाले डॉ. गर्ग अब तक 33 पुस्तकें और 75 शोध पत्र लिख चुके हैं।


