फर्रुखाबाद। शहर कोतवाली में दर्ज एक मुकदमे की विवेचना कर रहे दरोगा पर पांच लाख रुपये लेने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने का गंभीर आरोप लगा है। मामले में दरोगा की मां ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर विवेचक और शहर कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एसपी ने पूरे प्रकरण की जांच सीओ सिटी को सौंप
जनपद बरेली के इज्जतनगर क्षेत्र स्थित आशुतोष सिटी गेट नंबर-3 निवासी राजबाला ने एसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उनके पति सोमपाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा थे और ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके बड़े पुत्र विवेक सिंह राणा को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली।
राजबाला के अनुसार उनकी पुत्रवधू साधना मानसिक रूप से परेशान रहती है और उसका उपचार बरेली में चल रहा है। वह अक्सर विवेक से विवाद करती थी। शिकायत में कहा गया है कि गत वर्ष कादरीगेट थाने में तैनाती के दौरान बंदरों के हमले में विवेक छत से गिरकर घायल हो गए थे। इसी बीच साधना वहां पहुंची और विवाद करने लगी। बाद में वह सहकारी संघ परिसर में बने कमरे में चली गई और अंदर से कुंडी बंद कर ली। आरोप है कि छज्जा टूटने से वह नीचे गिरकर घायल हो गई। इसके बाद साधना ने शहर कोतवाली में विवेक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
राजबाला ने आरोप लगाया कि मामले की विवेचना दरोगा कल्पेश चौधरी कर रहे थे। 24 फरवरी को जब वह रेलवे रोड चौकी पहुंचीं तो विवेचक ने उन्हें डांटते हुए कहा कि उनके पुत्र विवेक सिंह और नौकर नीरज को जेल भेज दिया जाएगा, यदि सात लाख रुपये का इंतजाम नहीं किया गया।
शिकायत के अनुसार 26 फरवरी को विवेचक एक सिपाही और महिला आरक्षी के साथ उनके घर पहुंचे। दबाव और धमकी के चलते उन्होंने मौके पर दो लाख रुपये दे दिए। बाद में रिश्तेदार चंद्रपाल से तीन लाख रुपये उधार लेकर कुल पांच लाख रुपये विवेचक को सौंप दिए। राजबाला का आरोप है कि विवेचक ने भरोसा दिया था कि रुपये मिलने पर मुकदमा समाप्त करा दिया जाएगा।
राजबाला ने कहा कि बाद में उन्हें पता चला कि विवेचक ने विवेक सिंह के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है। जब उन्होंने रुपये वापस मांगे तो कथित तौर पर उन्हें और उनके बेटे को जेल भेजने की धमकी दी गई। उन्होंने शहर कोतवाल से भी शिकायत की, लेकिन कई बार चक्कर लगाने के बावजूद कोई राहत नहीं मिली। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से पांच लाख रुपये वापस दिलाने तथा विवेचक और शहर कोतवाल के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
दरोगा कल्पेश चौधरी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि मूल एफआईआर में विवेक की मां का नाम भी शामिल था, जबकि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थीं। विवेचना के दौरान उनका नाम हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि फाइनल रिपोर्ट न लगाने से नाराज होकर उन पर रुपये लेने के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
पांच लाख रुपये लेने के बाद भी दरोगा पर चार्जशीट लगाने का आरोप, एसपी ने सीओ सिटी को सौंपी जांच


