– मृतक परिवार ने पुलिस पर लगाए जा रहे आरोपों का किया खंडन।
– पुलिस की कार्रवाई पर परिजनों ने जताया संतोष।
– भ्रामक खबरों से बचें, सत्य को सामने आने दें।
अनुराग तिवारी
औरैया: एक युवा डॉक्टर की असमय मौत केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दर्द बन जाती है। यूथ इंडिया दिवंगत डॉ. सौरभ बाजपेयी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा शोकाकुल माता-पिता, पत्नी और समस्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता है। किसी भी शब्द से इस अपूरणीय क्षति की भरपाई संभव नहीं है। हमारी प्रार्थना है कि परिवार को न्याय भी मिले और इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति भी।
इस पूरे प्रकरण में न्याय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, लेकिन न्याय केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि साक्ष्यों, तथ्यों और कानून के आधार पर ही संभव है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर अनेक प्रकार की खबरें और दावे प्रसारित किए गए। इनमें कुछ पोस्ट ऐसे भी रहे, जिनमें कोतवाली औरैया के प्रभारी निरीक्षक (SHO) राजकुमार सिंह को इस घटना से जोड़ने का प्रयास किया गया। लेकिन अब स्वयं मृतक के परिजनों ने मीडिया के सामने आकर स्पष्ट शब्दों में ऐसे आरोपों का खंडन किया है। परिजनों ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं और जांच निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ रही है।
यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि घटना से पूर्व विवाद पुलिस तक पहुँचा था। उस समय पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी और उपलब्ध परिस्थितियों में समझौते का प्रयास किया। यदि बाद में परिस्थितियाँ बदलती हैं या कोई नई घटना घटती है, तो उसके लिए उस समय की पुलिस कार्रवाई को बिना तथ्यों के कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। घटना के बाद अपर पुलिस अधीक्षक आलोक मिश्रा, क्षेत्राधिकारी शैलेन्द्र सिंह तथा SHO राजकुमार सिंह स्वयं लगातार सक्रिय रहे। पूरी रात चले रेस्क्यू अभियान की निगरानी की गई, यमुना नदी से शव बरामद कराया गया, परिजनों की तहरीर पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया और उपलब्ध साक्ष्यों, फेसबुक लाइव वीडियो तथा गवाहों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई। आज कई आरोपी जेल में हैं और संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध भी प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस ने किसी दबाव या प्रभाव में नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुसार कार्रवाई की है। यही कारण है कि विवेचना लगातार आगे बढ़ रही है और न्यायिक प्रक्रिया अपना काम कर रही है।
दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कुछ सोशल मीडिया मंच अधूरी जानकारी या अपुष्ट तथ्यों के आधार पर ऐसी सामग्री प्रसारित कर रहे हैं, जिससे जांच प्रभावित होने और जनता के बीच भ्रम फैलने की आशंका बढ़ जाती है। लोकतंत्र में पत्रकारिता का उद्देश्य प्रश्न उठाना अवश्य है, लेकिन उतना ही आवश्यक है कि प्रश्न तथ्यों पर आधारित हों, अफवाहों पर नहीं। आज आवश्यकता किसी को बचाने या फँसाने की नहीं, बल्कि सत्य को सामने लाने की है। यदि कोई दोषी है तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए, और यदि किसी निर्दोष को बिना साक्ष्य बदनाम किया जा रहा है तो उसकी प्रतिष्ठा की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। डॉ. सौरभ बाजपेयी को न्याय मिले, उनके परिवार को न्याय मिले और समाज को सत्य मिले—यही इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


