– स्वास्थ्य माफिया में मचा हड़कंप
– फर्रुखाबाद अगला टारगेट
लखनऊ /रामपुर/फर्रुखाबाद । उत्तर प्रदेश में फर्जी अस्पतालों, झोलाछाप चिकित्सा और अवैध स्वास्थ्य कारोबार के खिलाफ चल रहे अभियान ने अब बड़ा रूप ले लिया है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री की सख्त कार्यशैली के बीच रामपुर में स्वास्थ्य विभाग ने एक ही दिन में 32 अस्पतालों और क्लीनिकों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर स्वास्थ्य महकमे में हलचल मचा दी। सीएमओ बदलने के बाद अगला टारगेट फर्रुखाबाद में स्थापित मानक विहीन अस्पताल हैं जिसको लेकर शासन ने तैयारियां शुरू की है।
सुबह से शुरू हुई कार्रवाई देर शाम तक चलती रही। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर अस्पतालों के पंजीकरण, चिकित्सकीय मानकों, डॉक्टरों की उपलब्धता, ऑपरेशन थिएटर, उपकरणों और दस्तावेजों की गहन जांच की। कार्रवाई की भनक लगते ही कई अस्पताल संचालकों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ संस्थानों के शटर गिर गए तो कई संचालक मौके से गायब हो गए।
प्रारंभिक जांच में कई अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं मिलने की बात सामने आई है। कुछ अस्पताल बिना वैध पंजीकरण के संचालित पाए गए, जबकि कई जगहों पर चिकित्सकीय मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप हैं। जांच टीमों ने दस्तावेजों को कब्जे में लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है।
प्रदेश में पिछले कई महीनों से डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक लगातार फर्जी अस्पतालों और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। कई जिलों में स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि नियमों को ताक पर रखकर चल रहे अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। रामपुर की कार्रवाई को इसी अभियान की बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों के खिलाफ नोटिस जारी किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर पंजीकरण निरस्त करने, सीलिंग और एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग ने साफ कर दिया है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
रामपुर में हुई इस व्यापक कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश के निजी अस्पताल संचालकों में संदेश गया है कि अब केवल कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपना चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद आम लोगों ने भी राहत की भावना व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि वर्षों से फर्जी अस्पतालों और अप्रमाणित चिकित्सा केंद्रों की शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन पहली बार इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई होती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अब चर्चा इस बात की है कि यदि यही अभियान आगे भी जारी रहा तो प्रदेश के कई जिलों में स्वास्थ्य माफिया और अवैध अस्पतालों का नेटवर्क बड़े संकट में पड़ सकता है।


