सचिव अवधेश बाथम की भूमिका पर सवाल, फर्म को भेज दी मजदूरों की रकम
फर्रुखाबाद। विकासखंड मोहम्मदाबाद की पांच ग्राम पंचायतों जाजपुर गोवा, जाजपुर बंजारा, सीतवनपुर पिथू, सीतवनपुर पिसू और बरा केशव में प्रशासक नियुक्त होने के बाद कराए गए कार्यों और भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन के निर्देशों के मुताबिक जिलाधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कार्य नहीं कराया जाना था, लेकिन इसके बावजूद पंचायतों में कार्य कराकर सरकारी धन का भुगतान कर दिया गया।
प्रशासक नियुक्त होने के बाद शासन स्तर से व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि नया कार्य शुरू करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना जरूरी होगा। ग्रामीणों का आरोप है कि पांचों पंचायतों में इस व्यवस्था को दरकिनार कर काम कराए गए और भुगतान भी जारी कर दिए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना अनुमति काम कराने और भुगतान करने की अनुमति किस स्तर से मिली?
मामले में सबसे बड़ा सवाल मजदूरों की रकम फर्म को भुगतान किए जाने को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरों से काम कराया गया तो उनके नाम, मस्टर रोल और भुगतान का स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए। इसके बावजूद मजदूरी से जुड़ी रकम फर्म को किस आधार पर दी गई, इसकी जांच जरूरी है।
पांचों पंचायतों में एमडी ट्रेडिंग कंपनी को भुगतान किए जाने की बात भी जांच के घेरे में है। ग्रामीणों ने कंपनी के दस्तावेज, पंजीकरण, वास्तविक कार्यालय और पंचायतों से किए गए कारोबार की जांच की मांग की है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर एक ही फर्म को पांच ग्राम पंचायतों में भुगतान किए जाने के पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई और भुगतान से पहले किन दस्तावेजों का सत्यापन हुआ?
पूरे मामले में ग्राम पंचायत सचिव अवधेश बाथम की भूमिका पर ग्रामीणों ने सीधे सवाल खड़े किए हैं। पंचायतों के कार्यादेश, मस्टर रोल, बिल-वाउचर, बैंक भुगतान, कार्ययोजना और अनुमति संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश चौरसिया ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं सचिव अवधेश बाथम ने बताया कि कार्य पुराने कार्ययोजना के हैं और एमडी ट्रेडिंग कंपनी बिजाधरपुर की है, जिससे सामान लिया जाता है। मजदूरों के भुगतान को लेकर जानकारी मांगे जाने पर उन्होंने बातचीत समाप्त कर दी।
अब ग्रामीणों ने पांचों पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति के बाद हुए सभी कार्यों की स्थलीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही एमडी ट्रेडिंग कंपनी से जुड़े दस्तावेज और पंचायतों से हुए भुगतान की भी जांच की मांग उठाई गई है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि सरकारी धन खर्च करने में शासन के निर्देशों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।


