अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला और अन्य देव विग्रहों की सेवा में लगे अर्चकों के लिए अब नई नियमावली लागू कर दी गई है। मंदिर ट्रस्ट की पुनर्गठित धार्मिक समिति ने सेवाकाल में धार्मिक मर्यादा और अनुशासन को लेकर 12 बिंदुओं वाली नियमावली जारी की है। शुक्रवार को सभी 35 अर्चकों के साथ बैठक के बाद इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।
नई व्यवस्था के तहत अर्चकों के लिए सेवाकाल में परंपरानुसार तिलक लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही पंचकेशी का पालन करते हुए बाल, दाढ़ी, मूंछ और शिखा रखने के निर्देश दिए गए हैं। अर्चकों को धार्मिक समिति की ओर से निर्धारित पीतवस्त्र, अचला और उत्तरीय पहनना होगा। गर्भगृह में मोबाइल फोन लेकर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
नियमावली में अर्चकों के लिए सेवाकाल के दौरान निर्धारित स्थान पर रहने की व्यवस्था की गई है। किसी आवश्यक कार्य से स्थान छोड़ने से पहले पाली प्रमुख को लिखित संदेश देकर कारण बताना होगा। मंदिर की सीमा के नियमों का उल्लंघन करने पर पंचगव्य प्राशन का प्रावधान भी किया गया है। शौच जाने के बाद बिना स्नान किए मंदिर अथवा कोठार में प्रवेश पर रोक रहेगी।
सेवाकाल के दौरान अर्चकों को मंदिर व्यवस्था, धर्मगुरु और आचार्यों के अतिरिक्त ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं या सुरक्षाकर्मियों से अनावश्यक संपर्क, चर्चा, बैठक अथवा स्पर्श से बचना होगा। आपसी बातचीत, समूह में चर्चा, हास-परिहास और कटुता के प्रदर्शन से भी दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नई नियमावली में किसी असहमति या असंतोष की स्थिति में सीधे आचार्य को अवगत कराकर मार्गदर्शन लेने को कहा गया है। पाली समाप्त होने पर सहयोगियों और मंदिर व्यवस्था के संबंध में लिखित समीक्षा देने की व्यवस्था भी की गई है। पारिवारिक सदस्यों अथवा इष्ट-मित्रों के आने पर दर्शन और प्रसाद संबंधी सहयोग आचार्य के निर्देश के अनुसार ही किया जाएगा।
मंदिर में प्रयुक्त सोना-चांदी और अन्य धातुओं के बर्तनों की गिनती भी अनिवार्य की गई है। सेवकों को पार्षद दिए जाने से पहले और स्वच्छता के बाद उनकी संख्या का मिलान करना होगा। प्रत्येक पाली प्रमुख को इसकी जानकारी नियमित रूप से निर्धारित ग्रुप में अपडेट करनी होगी। गर्भगृह में मंदिर व्यवस्था से उपलब्ध भोग-प्रसाद के अलावा बाहर का कोई सामान ले जाने पर भी रोक रहेगी।


