4,894 लोग लापता; 13 हजार से ज्यादा का रेस्क्यू
काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के 13 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। सात जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश के लिए नेपाल सेना के साथ भारतीय बचाव दल भी जुटे हैं। अब तक 13 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 4,894 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 587 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है, जो पहाड़ी इलाकों में टूटे रास्तों, भारी मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के बीच लापता हैं। हादसे को करीब दो सप्ताह बीतने के साथ ही उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीदें भी कमजोर होती जा रही हैं।
चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना की करीब 250 मीटर लंबी सुरंग में छह लोगों के फंसे होने की आशंका है। इन्हें बचाने के लिए भारतीय सेना की 35 सदस्यीय टीम, नेपाल सेना और अन्य बचाव दल संयुक्त अभियान चला रहे हैं। टीम सुरंग के भीतर करीब 130 मीटर तक पहुंच चुकी है। परियोजना में मौजूद 71 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। बचाव अभियान पूरा होने में अभी तीन से चार दिन लगने का अनुमान है।
सात जलविद्युत परियोजनाओं में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अपर त्रिशूली-1 की सुरंग में करीब 400 मीटर तक तलाश की जा चुकी है, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मेलुंग खोला परियोजना के आसपास करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में ड्रोन से खोज की जा रही है। त्रिशूली-3ए में सुरंग और पावर हाउस, जबकि त्रिशूली-3बी परियोजना में ड्रोन और थर्मल कैमरों से तलाश जारी है।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में अब तक 1,356 लोगों की मौत हो चुकी है। तिब्बत में भी 43 लोगों की जान गई है और 519 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए उनके परिजनों से डीएनए नमूने मांगे गए हैं, ताकि बरामद शवों की पहचान की जा सके।
नेपाल ने आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 2 करोड़ डॉलर यानी करीब 189 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। नेपाल का कहना है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उसका योगदान 0.1 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन जलवायु परिवर्तन का असर देश पर तेजी से बढ़ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में नेपाल के पहाड़ों ने करीब एक-तिहाई बर्फ खो दी है। मौजूदा आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक खतरे और जलवायु परिवर्तन की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।


