– हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल एसएलपी सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
– हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए आगे की विवेचना का रास्ता साफ
फर्रुखाबाद। सगे चाचा-चाची की हत्या से जुड़े करीब दो दशक पुराने मामले में माफिया डॉ.अनुपम दुबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अनुराग दुबे उर्फ दब्बन बनाम स्टेट ऑफ यूपी मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को 8 सितंबर 2026 को खारिज कर दिया गया। उपलब्ध न्यायालयीय विवरण के मुताबिक याचिका एसएलपी जो 23 अगस्त 2026 को पंजीकृत हुई थी। मामले की सुनवाई के जस्टिस सूर्यकांत सी मोहन एवं माल्या वारसी की बेंच ने की।
मामला 6 अगस्त 2005 को मैनपुरी के बेवर थाना क्षेत्र में हुई दोहरी हत्या से जुड़ा है। एफआईआर में मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोप था कि आरोपियों ने रंजिश के चलते पीड़ित के पिता की हत्या की और मां को गोली मारी, जिनकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
इस मामले में पहले पुलिस ने वर्ष 2006 में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, जिसे न्यायालय ने 4 अप्रैल 2006 को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष की ओर से मामले की दोबारा पड़ताल की मांग उठी। पुलिस ने आगे की जांच शुरू की, जिसके खिलाफ अनुराग दुबे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 अगस्त 2026 को अनुराग दुबे की याचिका खारिज करते हुए साफ किया था कि अंतिम रिपोर्ट स्वीकार हो जाने के बाद भी कानून के तहत आगे की विवेचना की जा सकती है। हाईकोर्ट ने विवेचना को निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी तरीके से किए जाने की अपेक्षा भी जताई थी।
हाईकोर्ट के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया था कि जांच के स्तर पर आरोपी को जांच की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या उसे रोकने का अधिकार नहीं है। संज्ञेय अपराध की जांच करना जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में आता है और अदालत जांच को तब तक बाधित नहीं कर सकती, जब तक प्रक्रिया कानून के अनुरूप चल रही हो।
इसी कानूनी स्थिति के बीच अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी भी 8 सितंबर को खारिज हो गई है।
मामले की सबसे अहम बात यह है कि पुलिस की पहले की विवेचना में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होने के बावजूद अब आगे की विवेचना का रास्ता खुला हुआ है। इसका उद्देश्य पुराने मामले में उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और अन्य पहलुओं की नए सिरे से जांच कर यह पता लगाना है कि वर्ष 2005 में हुई इस दोहरी हत्या के पीछे वास्तविक हत्यारा कौन था।
यानी करीब 21 साल पुरानी हत्या की फाइल एक बार फिर खुल चुकी है और अब जांच की दिशा आरोप तय करने से पहले वास्तविक हत्यारों तक पहुंचने पर केंद्रित होगी।


