राजभर ने अखिलेश से पूछा- फातिहा पढ़ने जाएंगे
सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को 16 घंटे चली बुलडोजर कार्रवाई के बाद पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। मलबा हटाते समय मौके पर करीब 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा कुआं मिलने से मामला और चर्चा में आ गया है। प्रशासन ने कुएं की ऐतिहासिकता और उम्र का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को जांच के लिए बुलाया है। फिलहाल कुएं को लोहे की चादर से ढककर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
शनिवार तड़के करीब चार बजे छह बुलडोजरों के साथ शुरू हुई कार्रवाई रात तक चली। करीब 200 पुलिस और पीएसी जवानों की तैनाती के बीच मस्जिद को ढहाया गया और रातभर मलबा हटाने का काम जारी रहा। रविवार सुबह मलबा हटाने के दौरान भारी स्लैब मिला। पोकलैंड से स्लैब नहीं टूटने पर कटर से उसे काटा गया, जिसके नीचे कुआं दिखाई दिया।
कुएं को लेकर भी उठे सवाल: मस्जिद को अवैध बताकर शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया कि यहां पहले कोई पुराना पूजा स्थल या मंदिर रहा होगा। उन्होंने कुएं की पुरातात्विक जांच कराने की मांग की। हालांकि, एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने स्पष्ट किया कि कुआं कितना पुराना है, यह एएसआई की जांच के बाद ही पता चलेगा। अभी इसके इतिहास को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
प्रशासन के मुताबिक मस्जिद करीब 3300 वर्गफीट क्षेत्र में बनी थी। 10 फरवरी 2025 को इसे अवैध बताते हुए शिकायत की गई थी। जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा। 16 जुलाई 2026 को नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने निर्माण को अवैध मानते हुए इसे हटाने और 6.41 करोड़ रुपये हर्जाना वसूलने का आदेश दिया था। इसके बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया चली और 2 सितंबर को जिला अदालत ने ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश को बरकरार रखा।
मस्जिद पक्ष हाईकोर्ट जाएगा: मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता बाबर वसीम ने कहा कि कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दाखिल की जाएगी। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके अनुसार संबंधित आदेश बेदखली से जुड़ा था और अपील के लिए समय बचा था। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी कार्रवाई में जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए कहा कि मामले को सदन, न्यायपालिका और सड़क पर उठाया जाएगा।
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज कसा, जबकि विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई को संविधान और न्यायिक प्रक्रिया से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा। फिलहाल प्रशासन की निगाह एएसआई की जांच पर है, जिससे कुएं की उम्र और ऐतिहासिक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


