– नवंबर-दिसंबर 2026 में चुनाव कराने की रणनीति ,
– जनगणना और मतदाता सूची बना बड़ा फैक्टर
शरद कटियार
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव निर्धारित समय से पहले कराए जाने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्र सरकार और प्रमुख राजनीतिक दल फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित चुनावों को नवंबर-दिसंबर 2026 में कराने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले कुछ महीनों के भीतर चुनावी सरगर्मी चरम पर पहुंच सकती है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2027 में समाप्त होना है। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और लगभग 15 करोड़ से अधिक मतदाता चुनावी प्रक्रिया में भाग लेते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 273 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि समाजवादी पार्टी गठबंधन ने 125 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
चुनाव समय से पहले कराने की चर्चाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण माना जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार फरवरी 2027 के आसपास जनगणना का दूसरा चरण शुरू हो सकता है। चुनाव आयोग और सरकार दोनों ही नहीं चाहते कि जनगणना और विधानसभा चुनाव जैसी विशाल प्रक्रियाएं एक साथ चलें, जिससे प्रशासनिक और सुरक्षा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़े।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में चुनाव कराने के लिए लाखों कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की आवश्यकता पड़ती है। अनुमान है कि चुनावी ड्यूटी के लिए 5 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी, हजारों प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ती है। ऐसे में जनगणना और चुनाव का एक साथ होना प्रशासनिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
उधर भाजपा ने अपने संगठन को पहले से ही चुनावी मोड में लाने के संकेत दिए हैं। पार्टी नेतृत्व द्वारा विभिन्न राज्यों की इकाइयों को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने, मतदाता संपर्क अभियान तेज करने और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं।
विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के बीच संभावित तालमेल, जातीय जनगणना, बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों को लेकर रणनीति बनाई जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि चुनाव समय से पहले होते हैं तो विपक्ष को अपनी रणनीति और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करनी होगी।
चुनाव आयोग की दृष्टि से भी नवंबर-दिसंबर 2026 का समय अपेक्षाकृत सुविधाजनक माना जा रहा है। मतदाता सूची पुनरीक्षण, बूथ सत्यापन और अन्य चुनावी तैयारियों को समय रहते पूरा किया जा सकता है। हालांकि अभी तक चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से विधानसभा चुनावों की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि समय से पहले चुनाव कराने का फैसला पूरी तरह राजनीतिक परिस्थितियों, प्रशासनिक तैयारियों और जनगणना कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी हलचल अपेक्षा से पहले दिखाई देने लगी है और सभी दल अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गए हैं।


