गंगा का कहर चरम पर: दर्जनों गांव जलमग्न, पलायन शुरू… स्वास्थ्य कैंप नहीं, अधिकारी भी नदारद
अमृतपुर: गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर अब अमृतपुर तहसील के लिए भयावह संकट बनता जा रहा है। रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया, जो 136.80 मीटर के चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है। इसके बाद करनपुर घाट, मढ़ैया तौफीक, मंझा की मढ़ैया, फखरपुर, बनारसीपुर, सुभानपुर, कुडरी सारंगपुर समेत दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों ने अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है, जबकि सैकड़ों लोग आज भी पानी से घिरे घरों में रहने को मजबूर हैं।बाढ़ ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हजारों बीघा खेतों में खड़ी धान, मक्का, बाजरा और अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो गई है और पशुओं के लिए चारे का भी संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटे में जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति और भयावह हो जाएगी।उधर करनपुर घाट पर गंगा का तेज कटान लगातार जारी है। नदी की उफनती धाराएं खेतों को निगल रही हैं और अब कई मकानों पर भी खतरा मंडराने लगा है। कटान से सहमे ग्रामीण पूरी रात जागकर अपने घरों और सामान की निगरानी कर रहे हैं।सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बाढ़ प्रभावित कई गांवों में अभी तक न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची है और न ही कोई मेडिकल कैंप लगाया गया है। संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने के बावजूद दवाइयों का वितरण तक नहीं किया गया। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल, राजस्व कर्मी और कई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी भी प्रभावित क्षेत्रों में नहीं पहुंचे हैं। न फसलों का सर्वे हो रहा है और न ही नुकसान का आकलन किया जा रहा है। राहत सामग्री, पीने का स्वच्छ पानी और आवश्यक सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्यालयों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने, मेडिकल कैंप लगाने, दवाइयों और खाद्यान्न की व्यवस्था करने, नावों की संख्या बढ़ाने तथा कटान रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कराने की मांग की है।
यदि गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा, तो अमृतपुर तहसील के और भी गांव बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और समय पर राहत पहुंचाने की होगी।


