बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के करीब 2000 बेरोजगार युवाओं से मल्टीलेवल मार्केटिंग (एमएलएम) नेटवर्किंग के नाम पर लगभग चार करोड़ रुपये की ठगी के मामले की जांच अब साइबर क्राइम थाने को सौंप दी गई है। पुलिस आईटी एक्ट सहित सभी तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। मामले का मुख्य आरोपी आजमगढ़ के मेंहनगर निवासी इंद्रजीत कुमार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीम लगातार दबिश दे रही है। साथ ही उसके परिजनों और करीबी सहयोगियों के बैंक खातों, संपत्तियों और लेन-देन की भी गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी बेरोजगार युवाओं को कम समय में अधिक कमाई का सपना दिखाकर अपने जाल में फंसाता था। युवाओं से 20 से 30 हजार रुपये तक नकद जमा कराए जाते थे और उन्हें मात्र एक घंटे का प्रशिक्षण देकर हेल्थ प्रोडक्ट्स की बिक्री के लिए भेज दिया जाता था। इतना ही नहीं, उनसे नए सदस्यों को जोड़ने का भी दबाव बनाया जाता था ताकि नेटवर्क लगातार बढ़ता रहे। अधिकतर पीड़ित बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से थे, जिसके कारण वे स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज कराने में भी असमर्थ रहते थे। पुलिस के अनुसार पकड़े जाने के डर से संगठन नकद लेन-देन को प्राथमिकता देता था और बैंकिंग रिकॉर्ड से बचने की कोशिश करता था।
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा 20 मई को हुआ, जब पुलिस ने सारनाथ क्षेत्र में दो स्थानों पर छापेमारी कर मल्टीलेवल मार्केटिंग के नाम पर चल रहे कथित ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान लगभग 250 युवाओं को वहां से रेस्क्यू किया गया, जिन्हें बेहतर रोजगार और बड़ी कमाई का सपना दिखाकर जोड़ा गया था। मौके से कंपनी से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य संचालक इंद्रजीत कुमार फरार हो गया। पुलिस अब साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी का नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला हुआ था और उसके साथ कौन-कौन लोग सक्रिय रूप से जुड़े थे।
इसी बीच वाराणसी में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक शिक्षक से बीमा और म्यूचुअल फंड में निवेश के नाम पर 35 लाख रुपये ठग लिए गए। जालसाजों ने खुद को वित्तीय कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित को पहले से किए गए निवेश पर भारी लाभ का लालच दिया और कई किश्तों में रकम ट्रांसफर करा ली। ठगों ने यहां तक दावा किया कि निवेश की गई राशि बढ़कर 90 लाख रुपये हो जाएगी। जब आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। मामले की शिकायत साइबर हेल्पलाइन, बैंक और पुलिस को दी गई है तथा साइबर सेल पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। इन दोनों घटनाओं ने बेरोजगारों और निवेशकों को निशाना बनाने वाले साइबर एवं वित्तीय अपराधों के बढ़ते खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है।


