चेन्नई
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी दूरी के चलते स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। बुधवार को विजय ने राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से राजभवन में मुलाकात कर सरकार गठन का दावा पेश किया और समर्थन पत्र भी सौंपा। सूत्रों के मुताबिक, इस पत्र में 112 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता होती है। चुनाव में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 5 सीटों के साथ टीवीके को समर्थन देने का ऐलान किया है। इस तरह गठबंधन का आंकड़ा 113 तक पहुंचा, लेकिन विजय के दो सीटों से जीतने और एक सीट छोड़ने की बाध्यता के चलते यह संख्या घटकर 112 रह जाती है। ऐसे में बहुमत के लिए अभी भी कम से कम 6 विधायकों की जरूरत बनी हुई है।
दूसरी ओर, राज्यपाल अर्लेकर टीवीके के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं और उन्होंने अभी तक सरकार गठन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, विजय अब विदुथलाई चिरुथैगल काची, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) जैसे दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हैं।
चुनाव परिणामों की बात करें तो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 59 और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को 47 सीटें मिली हैं। अन्य दलों में पीएमके को 4, आईयूएमएल को 2, जबकि सीपीआई, वीसीके और सीपीएम को 2-2 सीटों पर जीत हासिल हुई है। भाजपा, डीएमडीके और एएमएमके को 1-1 सीट मिली है।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए लंबे समय से सहयोगी रही डीएमके से नाता तोड़कर टीवीके को समर्थन दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विजय के आग्रह पर यह निर्णय लिया गया है। वहीं, इस फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में जश्न भी मनाया।
सरकार गठन की प्रक्रिया के बीच चर्चा है कि यदि जरूरी समर्थन जुटा लिया जाता है तो विजय 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला राज्यपाल के रुख और बहुमत साबित करने की स्थिति पर निर्भर करेगा, जिससे तमिलनाडु की सियासत में फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।


